हरियाणा 28 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) हरियाणा पुरातत्व विभाग प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिला पंचकूला के ब्लॉक पिंजौर स्थित गांव बुर्ज कोटियां का करीब 300 साल पुराना बुर्ज फोर्ट (निगरानी टावर) प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी अनदेखी के चलते खंडहर में तब्दील हो चुका है। मुगल काल के अंतिम चरण में निर्मित यह ऐतिहासिक धरोहर अब ढहने की कगार पर पहुंच गई है।गांव बुर्ज कोटियां की पहचान रहे इस बुर्ज फोर्ट की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। तेज बारिश और रख-रखाव के अभाव में इसकी दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। बड़े-बड़े पत्थर टूटकर अंदर और बाहर गिर रहे हैं। कभी चारों ओर से प्रवेश के लिए बनी पत्थरों की सीढ़ियां अब पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द संरक्षण कार्य शुरू नहीं किया गया तो यह ऐतिहासिक फोर्ट पूरी तरह जमींदोज हो सकता है।रेवेन्यू रिकॉर्ड नहीं मिलने से अटका संरक्षण ग्रामीणों और पंचायत द्वारा कई बार स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और हरियाणा सरकार से इस फोर्ट को बचाने की मांग की जा चुकी है। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रेवेन्यू रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण बुर्ज फोर्ट को स्टेट प्रोटेक्शन में शामिल नहीं किया जा सका है। हालांकि मुख्यमंत्री स्तर से इसके संरक्षण को लेकर मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के चलते काम अटका हुआ है। विभाग रिकॉर्ड जुटाने के प्रयास कर रहा है, लेकिन देरी के कारण फोर्ट की हालत लगातार खराब होती जा रही है।गांव की पहचान और बुजुर्गों की पाठशाला रहा है फोर्ट गांव के मौजूदा सरपंच काबल सिंह, पूर्व सरपंच यादव कुमार और पंच सोहन सिंह का कहना है कि इस बुर्ज फोर्ट से पूरे गांव की गहरी भावनात्मक जुड़ाव है। बुजुर्ग बताते हैं कि यह फोर्ट कभी गांव के बुजुर्गों की पाठशाला और निगरानी केंद्र रहा है। इसी बुर्ज फोर्ट के कारण गांव का नाम ‘बुर्ज’ पड़ा।ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द रेवेन्यू रिकॉर्ड की प्रक्रिया पूरी कर इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।