हिमाचल प्रदेश 20 जनवरी( दैनिक खबरनामा ) हिमाचल प्रदेश के लिए 25 जनवरी का दिन बेहद खास होने जा रहा है। राज्य अपने गठन के 55 वर्ष पूरे कर 56वें पूर्ण राज्यत्व दिवस का उत्सव मनाने जा रहा है। इस बार यह आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक होगा, क्योंकि राज्य स्तरीय समारोह कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध हेरिटेज गांव प्रागपुर में आयोजित किया जा रहा है। यह फैसला केवल एक स्थान चयन नहीं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन दृष्टि को नई पहचान देने वाला कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में राज्य सरकार द्वारा इस समारोह को प्रागपुर जैसे ऐतिहासिक गांव में आयोजित करना यह संकेत देता है कि सरकार विकास के साथ-साथ विरासत संरक्षण को भी समान महत्व दे रही है। जब किसी राज्य का सबसे बड़ा उत्सव किसी ग्रामीण विरासत स्थल पर मनाया जाता है, तो वह सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करता है।देश का पहला हेरिटेज विलेज है प्रागपुर कांगड़ा जिले की खूबसूरत वादियों में बसा प्रागपुर देश का पहला हेरिटेज विलेज है, जिसे दिसंबर 1997 में हिमाचल सरकार ने यह दर्जा दिया था। करीब 300 साल पुराने इस गांव में आज भी पत्थर जड़ी गलियां, स्लेट से बने मकान, प्राचीन हवेलियां, कुएं और पारंपरिक दुकानें मौजूद हैं, जो हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में दर्शाती हैं।गांव का तालाब, ऐतिहासिक लाला रेरूमल हवेली, चौज्जर हवेली, बुटेल मंदिर और सूद समुदाय के प्रांगण आज भी पुराने प्रागपुर की कहानी कहते हैं। यूरोपीय शैली में बना प्रसिद्ध होटल ‘जजेस कोर्ट’ भी यहां की पहचान का अहम हिस्सा है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है।राजकुमारी प्राग देई की स्मृति से जुड़ा है इतिहास इतिहासकारों के अनुसार, प्रागपुर की स्थापना 16वीं शताब्दी के अंत में जसवान रियासत से जुड़ी राजकुमारी प्राग देई की स्मृति में की गई थी। यह क्षेत्र कभी जसवान रियासत का हिस्सा था, जहां शासक ने कुठियाला सूद के नेतृत्व में विद्वानों के एक दल को राजकुमारी की याद में उपयुक्त स्थान तलाशने का निर्देश दिया था। तभी से यह गांव सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।पर्यटन राजधानी कांगड़ा की ओर बड़ा संकेत राज्यत्व दिवस समारोह का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब सुक्खू सरकार कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। प्रागपुर जैसे हेरिटेज गांव में राज्यस्तरीय कार्यक्रम होने से न केवल घरेलू बल्कि विदेशी पर्यटकों का भी ध्यान इस ओर आकर्षित हो सकता है। यह कदम हिमाचल पर्यटन को मास टूरिज्म से हटाकर “मीनिंगफुल और कल्चर-बेस्ड टूरिज्म” की ओर ले जाने वाला माना जा रहा है।संरक्षण और रोजगार की उम्मीदें हालांकि, वक्त के साथ प्रागपुर की कई ऐतिहासिक इमारतें जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं और कई परिवार रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। ऐसे में राज्यत्व दिवस जैसे भव्य आयोजन से उम्मीद की जा रही है कि सरकार यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास, विरासत संरक्षण और स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसरों की घोषणा कर सकती है।इस आयोजन से गांव की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलने की संभावना है। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि बिना विरासत को नुकसान पहुंचाए विकास कैसे किया जा सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो हिमाचल के अन्य ऐतिहासिक गांवों के लिए भी यह एक मॉडल बन सकता है।

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