दैनिक खबरनामा 25 मार्च 2026 नई दिल्ली केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश किया। बिल को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली, जहां विपक्षी सांसदों ने इसे न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करने वाला और लोकतांत्रिक संतुलन के खिलाफ बताया।कांग्रेस सांसद अजय माकन ने बिल को “लोकतंत्र के स्तंभों के बीच संतुलन बिगाड़ने का खतरनाक प्रयास” बताया। वहीं डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार करने के लिए वैधानिक हस्तक्षेप कर रही है। कांग्रेस के विवेक के. तन्खा ने भी कहा कि सरकार बिल के जरिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को पलटने की कोशिश कर रही है।बिल के सेक्शन 4(1)(ए) को लेकर सबसे ज्यादा विवाद है। इसमें प्रावधान है कि केंद्र सरकार लोकहित में नोटिफिकेशन जारी कर सीएपीएफ के तहत किसी नए ‘सशस्त्र बल’ को जोड़ सकती है। जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में नए बल के गठन का रास्ता खुल सकता है।इसके अलावा सेक्शन 3 में यह प्रावधान भी शामिल है कि किसी भी अदालत के आदेश या निर्णय का इस एक्ट पर असर नहीं पड़ेगा। इसको लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा की शक्ति को सीमित करता है।वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए नित्यानंद राय ने स्पष्ट किया कि संसद को सीएपीएफ पर कानून बनाने का पूरा अधिकार है और यह बिल किसी भी न्यायिक निर्णय को समाप्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि इससे मौजूदा व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा।दूसरी ओर, बीएसएफ के पूर्व डीआईजी जेएस भल्ला और धमेंद्र पारिख जैसे पूर्व अधिकारियों ने इस विधेयक को ‘काला नियम’ बताते हुए इसका विरोध किया है और देशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है।