चंडीगढ़ 28 जनवरी 2026 (जगदीश कुमार ) चंडीगढ़ में 29 जनवरी को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने एक बार फिर मेयर के प्रत्यक्ष चुनाव और पांच साल के निश्चित कार्यकाल की मांग को जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत चुने जा रहे मेयर और उप-मेयर संरचनात्मक रूप से अधिकारहीन और अप्रभावी साबित हुए हैं, जिससे नगर निगम प्रशासन कमजोर हुआ है।मनीष तिवारी ने बताया कि वर्ष 1996 से अब तक करीब 30 मेयर, 30 सीनियर डिप्टी मेयर और 30 डिप्टी मेयर चुने जा चुके हैं, यानी लगभग 90 सम्मानित लोग इन पदों पर रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम आज भी संस्थागत खामियों और गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि मौजूदा चुनाव प्रणाली कारगर नहीं है।उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता यह है कि चंडीगढ़ के सभी मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से पांच वर्षों के लिए मेयर का चुनाव किया जाए और उसे आवश्यक अधिकार दिए जाएं, ताकि वह शहर के विकास और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सके।
तिवारी ने बताया कि इसी उद्देश्य से उन्होंने 5 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था, जिसमें चंडीगढ़ में मेयर और उनके डिप्टी मेयरों के लिए पांच वर्ष का कार्यकाल और उनके दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक अधिकारों का प्रावधान किया गया है।उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव का समर्थन करें और चंडीगढ़ के बेहतर भविष्य के लिए एकजुट हों। साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा संसदीय सत्र के दौरान इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।अंत में मनीष तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मौजूदा ढांचा जारी रहा तो ये चुनाव और इन पदों पर आसीन होने वाले लोग केवल औपचारिक या सजावटी पदाधिकारी बनकर रह जाएंगे, जिससे शहर के विकास को भारी नुकसान होगा।