चंडीगढ़ 14 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ Punjab and Haryana High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी आपराधिक मामले में अदालत पहले ही अंतिम आदेश देकर एफआईआर रद्द कर चुकी है, तो बाद में समझौता टूटने या शादी का वादा पूरा न होने के आधार पर उस फैसले को वापस नहीं लिया जा सकता।यह फैसला जस्टिस Manisha Batra की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने एक महिला की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत द्वारा दिया गया अंतिम आदेश बाद में बदला या वापस नहीं लिया जा सकता।
मामला उस एफआईआर से जुड़ा था जिसमें महिला ने सेना के एक मेजर पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। इस मामले में Indian Penal Code की धारा 376, 506 और 328 के तहत केस दर्ज किया गया था। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया था।बाद में महिला ने अदालत में नई अर्जी दाखिल कर कहा कि समझौते के दौरान आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया था, लेकिन अब वह शादी करने से इनकार कर रहा है। इसलिए अदालत अपने पुराने आदेश को वापस ले और एफआईआर को फिर से बहाल करे।हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2024 में दिया गया फैसला केवल समझौते के आधार पर नहीं था, बल्कि मामले के तथ्यों की जांच के बाद यह पाया गया था कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला नहीं बनता।अदालत ने यह भी कहा कि यदि शादी के वादे के उल्लंघन को लेकर शिकायत है तो पीड़ित पक्ष अन्य कानूनी विकल्प अपना सकता है, लेकिन पहले से रद्द की जा चुकी आपराधिक कार्यवाही को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता।इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने महिला की अर्जी खारिज करते हुए अपने पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा।अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा “न्यूज़पेपर स्टाइल” या “टीवी न्यूज़ स्क्रिप्ट” में भी बना सकता हूँ, जिससे यह और आकर्षक लगे।