चंडीगढ़ 25 जनवरी 2026 ( जगदीश कुमार) चंडीगढ़ में सतलुज-यमुना लिंक (एस.वाई.एल.) नहर विवाद को लेकर एक बार फिर हरियाणा और पंजाब के बीच उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है। यह अहम बैठक 27 जनवरी को चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक की सबसे खास बात यह है कि इस बार केंद्र सरकार का कोई भी मंत्री इसमें शामिल नहीं होगा, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र अब इस विवाद से खुद को अलग रखते हुए दोनों राज्यों को आपसी सहमति से समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।
इससे पहले जुलाई, अगस्त और नवंबर 2025 में दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि, इन बैठकों के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद अब वर्ष 2026 में एस.वाई.एल. को लेकर यह पहली बड़ी बैठक बुलाई गई है।
नवंबर 2025 की बैठक के बाद से केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत केंद्र सरकार ने अपनी अगुवाई में पंजाब और हरियाणा के बीच पांच दौर की द्विपक्षीय बैठकें करवाई, लेकिन हर बार बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर आपसी बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की थी।सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अब इस विवाद में सीधी मध्यस्थता से पीछे हटती नजर आ रही है। इसकी पुष्टि 17 नवंबर को फरीदाबाद में हुई उत्तरी जोनल काउंसिल की बैठक से भी होती है, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नदी जल बंटवारे से जुड़े सभी मुद्दों को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया था।एस.वाई.एल. नहर विवाद दशकों से पंजाब और हरियाणा के बीच तनाव का बड़ा कारण रहा है। हरियाणा लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा है, जबकि पंजाब सरकार नहर निर्माण का विरोध करती रही है। ऐसे में 27 जनवरी को होने वाली यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें दोनों राज्य बिना किसी केंद्रीय दबाव के आपसी सहमति से समाधान खोजने की कोशिश करेंगे।राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें अब इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या लंबे समय से चले आ रहे इस जटिल विवाद पर कोई नई सहमति बन पाती है या नहीं।