चंडीगढ़ 18 जनवरी( जगदीश कुमार) चंडीगढ़ शहर में बारों को रात तीन बजे तक खुले रखने के प्रस्ताव को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। सामाजिक संगठन सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रशासन को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपा है। संगठन का कहना है कि यह प्रस्ताव चंडीगढ़ की मूल संस्कृति, अनुशासन और शांत जीवनशैली के बिल्कुल विपरीत है।एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.के. गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ देश का पहला नियोजित शहर है, जिसकी पहचान हमेशा से अनुशासन, स्वच्छता, हरियाली और संतुलित जीवनशैली रही है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले तक शहर के बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान रात नौ बजे तक बंद हो जाते थे, जो यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का स्वाभाविक हिस्सा था।
प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि चंडीगढ़ की खास पहचान उसकी सुबह से जुड़ी जीवनशैली है। सुखना लेक सहित शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग सैर, योग, दौड़ और साइक्लिंग करते नजर आते हैं। यही कारण है कि चंडीगढ़ को “सिटी ब्यूटीफुल” कहा जाता है। संगठन का मानना है कि देर रात तक बार खुले रहने से यह संतुलित दिनचर्या प्रभावित होगी और शहर की शांत छवि को नुकसान पहुंचेगा।युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में इस फैसले से युवाओं पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर भी गहरी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि देर रात तक बार संस्कृति को बढ़ावा मिलने से युवाओं की नींद का चक्र बिगड़ेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ेगा और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।आर.के. गर्ग ने कहा कि यह कदम खेल, शिक्षा, उद्यमिता और सकारात्मक विकास को प्रोत्साहित करने के बजाय युवाओं को देर रात के मनोरंजन और अस्वस्थ जीवनशैली की ओर धकेल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव समाज के समग्र स्वास्थ्य और उत्पादकता पर पड़ सकता है।
प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार की मांगसेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने प्रशासन से अपील की है कि इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले शहर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श किया जाए। संगठन का कहना है कि विकास के नाम पर चंडीगढ़ की मूल आत्मा और जीवनशैली से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह विकास और आधुनिक सुविधाओं के खिलाफ नहीं है, लेकिन ऐसे फैसले संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर ही लिए जाने चाहिए, ताकि चंडीगढ़ की विशिष्ट पहचान बनी रहे।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

चंडीगढ़ में ‘साहब-साहब’ संस्कृति खत्म होनी चाहिए प्रशासक गुलाब चंद कटारिया

चंडीगढ़ 14 मार्च 2026 ( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ के प्रशासक Gulab…
Share to :

होली पर चंडीगढ़ में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, 1150 पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

चंडीगढ़ 3 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा) चंडीगढ़ में होली के त्योहार को…
Share to :

Chandigarh के कई स्कूलों को फिर बम से उड़ाने की धमकी, दो दिन में ब्लास्ट की चेतावनी से हड़कंप

चंडीगढ़ 27 फरवरी 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ में एक बार फिर…
Share to :

PGI चंडीगढ़ में 1 मार्च से अलग कार्डियक इमरजेंसी शुरू, दिल के मरीजों को मिलेगा त्वरित विशेषज्ञ इलाज

चंडीगढ़ 17 फरवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) चंडीगढ़। Postgraduate Institute of Medical Education…
Share to :