पंजाब 24 जनवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा ) पंजाब बिजली के निजीकरण और प्रीपेड मीटर प्रणाली के विरोध में किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) भारत, पंजाब चैप्टर के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अब और अधिक तेज हो गया है। संगठन के आह्वान पर दूसरे चरण में पंजाब भर के हजारों बिजली उपभोक्ताओं ने अपने घरों से प्रीपेड मीटर उतारकर संबंधित बिजली विभाग के कार्यालयों में जमा कराए। इस दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन, नारेबाजी और सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, कर्मचारी और आम उपभोक्ता शामिल हुए।किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सभरा और महासचिव राणा रणबीर सिंह ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बिजली के निजीकरण के खिलाफ यह संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां आम जनता के हितों के खिलाफ हैं और प्रीपेड मीटर व्यवस्था गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगी। उनका कहना है कि प्रीपेड सिस्टम से उपभोक्ताओं को हर समय रिचार्ज की चिंता रहेगी और समय पर भुगतान न होने की स्थिति में बिजली कटने से दैनिक जीवन प्रभावित होगा।नेताओं ने बताया कि आंदोलन के पहले चरण में 5 दिसंबर 2025 को दो घंटे का सांकेतिक रेल रोको आंदोलन कर सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया गया था। इसके बाद 10 दिसंबर को प्रदेश भर में एसडीओ कार्यालयों पर बड़ी संख्या में प्रीपेड मीटर जमा कराए गए। अब दूसरे चरण में यह अभियान और व्यापक रूप ले चुका है, जिसमें गांव-गांव और शहर-शहर तक विरोध की लहर दिखाई दे रही है।
आंदोलनकारियों ने मांग की कि प्रीपेड मीटर की जगह पारंपरिक मैकेनिकल मीटर ही लगाए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को बिल भुगतान में सहूलियत मिल सके और बिजली सेवाएं बाधित न हों। उन्होंने सरकार से निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करने और बिजली को एक बुनियादी सार्वजनिक सेवा के रूप में बनाए रखने की अपील की।सुखविंदर सिंह सभरा और राणा रणबीर सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार बिजली संशोधन विधेयक को संसद में लाकर इसे लागू करने का प्रयास करती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर राज्यव्यापी प्रदर्शन, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।प्रदेश के कई जिलों में हुए इस विरोध प्रदर्शन से साफ है कि प्रीपेड मीटर और बिजली निजीकरण के खिलाफ जन असंतोष लगातार बढ़ रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।