मध्य प्रदेश 16 जनवरी(दैनिक खबरनामा) मध्य प्रदेश मुरैना जहां चाह, वहां राह—इस कहावत को मुरैना जिले के मेरगान निवासी प्रगतिशील किसान यशपाल कुशवाह ने सच कर दिखाया है। कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने के बाद यशपाल ने पारंपरिक खेती छोड़कर मधुमक्खी पालन शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने 500 मधुमक्खी बॉक्स लगाए और शहद का उत्पादन किया, लेकिन बाजार में शहद के अपेक्षित दाम न मिलने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।निराश होकर मधुमक्खी पालन छोड़ने की बजाय यशपाल ने नई तकनीक अपनाने का फैसला किया। उन्होंने मधुमक्खियों द्वारा फूलों से लाए जाने वाले पराग कणों को एकत्र कर उससे बी पोलन नामक सुपरफूड तैयार करना शुरू किया। बाजार में बी पोलन की कीमत शहद से लगभग पांच गुना अधिक मिलने लगी, जिससे मधुमक्खी पालन का व्यवसाय उनके लिए लाभकारी बन गया।यशपाल ने बताया कि मधुमक्खी बॉक्स को चारों ओर से बंद कर एक छोटा सा छेद छोड़ा जाता है। इस छेद पर लगी विशेष जाली में मधुमक्खियों के पैरों से गिरने वाले पराग कण जमा हो जाते हैं। एक बॉक्स से 10 से 15 दिनों में करीब 100 ग्राम पराग कण एकत्र हो जाता है। इन्हें सुखाकर और फिल्टर कर बी पोलन तैयार किया जाता है।
स्थानीय बाजार में बी पोलन की कीमत लगभग 500 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 1000 से 2000 रुपये प्रति किलो तक है। अब यशपाल न केवल अन्य किसानों को पराग कण संग्रह और बी पोलन बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं, बल्कि उनसे पराग कण खरीदकर उनकी आमदनी बढ़ाने में भी सहयोग कर रहे हैं।मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ डॉ. अशोक सिंह यादव के अनुसार, बी पोलन को प्रकृति का संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज, अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और कमजोरी व थकान दूर करने में सहायक है।यशपाल कुशवाह की यह सफलता कहानी क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो सीमित संसाधनों में भी नवाचार के जरिए बेहतर आमदनी की राह तलाश सकते हैं।