हरियाणा 21 जनवरी ( दैनिक खबरनामा ) हरियाणा का यमुनानगर जिला प्रदेश के सबसे हरे-भरे इलाकों में गिना जाता है। यहां बहने वाली दो बरसाती नदियां—सोम और पथराला—अपने भीतर एक अनोखा खजाना समेटे रहती हैं। मानसून के मौसम में पहाड़ों पर भारी बारिश के कारण ये नदियां पूरे उफान पर होती हैं और पहाड़ी इलाकों से बहकर आने वाली मिट्टी के साथ सोने के बेहद बारीक कण भी अपने साथ ले आती हैं।बरसात खत्म होने और जनवरी का महीना आते-आते दोनों नदियों की धारा शांत हो जाती है। इसी दौरान नदी के किनारों और तल में जमी रेत और मिट्टी से सोने के कण छानने का काम शुरू होता है। यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है, जिसे आज भी स्थानीय ग्रामीण पूरी मेहनत और धैर्य के साथ निभा रहे हैं।हर साल सरकार देती है ठेका
इन नदियों से सोना निकालने का अधिकार हर वर्ष हरियाणा सरकार टेंडर प्रक्रिया के जरिए देती है। इससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है, वहीं आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार और आजीविका का साधन मिलता है। यह काम कई पीढ़ियों से चला आ रहा है और आज भी अनेक परिवारों की रोजी-रोटी इसी पर निर्भर है।
मानकपुर गांव के जरनैल सिंह बताते हैं कि वे लकड़ी की जाली और एक विशेष पारंपरिक औजार की मदद से नदी की मिट्टी को बार-बार छानते हैं। कभी दिनभर की मेहनत के बाद 500 से 1000 रुपये तक कीमत का सोना मिल जाता है, तो कई बार पूरी मेहनत बेकार भी चली जाती है। इसके बावजूद ग्रामीण हर साल उम्मीद के साथ इस काम में जुट जाते हैं।जोखिम के बावजूद नहीं छोड़ते परंपरा ग्रामीणों का कहना है कि यह काम धैर्य और अनुभव मांगता है। पानी, ठंड और मेहनत के बावजूद लोग इसे इसलिए जारी रखते हैं क्योंकि यही उनकी पारंपरिक पहचान और आमदनी का जरिया है। प्रशासन की निगरानी में होने वाले इस कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में आज भी उत्साह बना रहता है।यमुनानगर की सोम और पथराला नदियां इस तरह न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक हैं, बल्कि धरती के भीतर छिपे सोने के कणों के जरिए सैकड़ों परिवारों की जिंदगी से भी जुड़ी हुई हैं।