चंडीगढ़ 14 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ ₹597 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED)ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। यह मामला सरकारी खातों से जुड़ी भारी रकम के दुरुपयोग से संबंधित है। जांच के अनुसार हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी संस्थानों के खातों में मौजूद करीब 597 करोड़ रुपये को तय नियमों के अनुसार फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखने की बजाय अवैध तरीके से निजी खातों और शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।ईडी की चंडीगढ़ जोनल टीम ने 12 मार्च को चंडीगढ़,मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु समेत कुल 19 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में सामने आया कि इस पूरे घोटाले को अंजाम देने में बैंक के कुछ पूर्व कर्मचारियों की अहम भूमिका रही।जांच एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार के ठिकानों पर भी तलाशी ली। इनके साथ ही इनके परिजनों, सहयोगियों और उनसे जुड़ी शेल कंपनियों की भी जांच की जा रही है। जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं उनमें स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि घोटाले की रकम को छिपाने के लिए सोने की खरीद-फरोख्त का फर्जी खेल रचा गया। इसके लिए ज्वेलर्स के बैंक खातों के जरिए पैसे को घुमाया गया और नकली बिल बनाकर सोना खरीदने का दिखावा किया गया।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि इस घोटाले की कुछ रकम मोहाली के होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा के खातों तक भी पहुंची। फिलहाल छापेमारी के दौरान विक्रम वाधवा नहीं मिले और उन्हें फरार बताया जा रहा है।ईडी ने कार्रवाई के दौरान 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल सबूत भी जब्त किए हैं। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।