दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 11 जून: यूटी प्रशासन ने प्रस्तावित होम-स्टे नीति के मसौदे में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए इसके दायरे को सीमित कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल एक कनाल या उससे बड़े आवासीय मकानों में ही होम-स्टे अथवा बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) सुविधा संचालित की जा सकेगी, जबकि फ्लैट्स को इस नीति से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली में हाल ही में एक बीएंडबी सुविधा में आग लगने की घटना के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने ड्राफ्ट नीति में यह बदलाव किया है। संशोधित मसौदे को अब आगे की प्रक्रिया के लिए इस्टेट ब्रांच को भेज दिया गया है।
अर्बन प्लानिंग विभाग द्वारा मंजूर किए गए संशोधित प्रावधानों के अनुसार होम-स्टे की अनुमति केवल एक कनाल या उससे बड़े स्वतंत्र आवासीय भवनों को मिलेगी। किसी भी आकार के फ्लैट में यह सुविधा शुरू नहीं की जा सकेगी। साथ ही, होम-स्टे संचालन के लिए मकान में किसी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव करने की अनुमति भी नहीं होगी।
पंजीकरण प्रक्रिया को भी अधिक सख्त बनाया गया है। यदि संपत्ति संयुक्त स्वामित्व में है तो सभी हिस्सेदारों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। नीति के तहत कमरों को गोल्ड और सिल्वर श्रेणी में विभाजित किया गया है। गोल्ड श्रेणी के लिए कमरे का न्यूनतम क्षेत्रफल 180 वर्ग फुट और सिल्वर श्रेणी के लिए 120 से 180 वर्ग फुट निर्धारित किया गया है। किसी भी मकान में अधिकतम आठ कमरों का ही उपयोग होम-स्टे के लिए किया जा सकेगा।
शहर की लगभग 100 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों का प्रतिनिधित्व करने वाला क्राफ्ड संगठन पहले से ही इस योजना का विरोध करता रहा है।
इसके अलावा होम-स्टे संचालन के लिए फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), कार्यशील अग्निशमन प्रणाली, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, एफएसएसएआई का फूड लाइसेंस तथा इस्टेट कार्यालय का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि इन प्रावधानों से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा और होम-स्टे गतिविधियों का बेहतर नियमन किया जा सकेगा।