दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 20 जून: भारतीय सेना ने एक बार फिर मानवीय मूल्यों और पेशेवर प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर भारत पहुंचे एक पाकिस्तानी नागरिक को सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भेज दिया। इस दौरान भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के बीच मुलाकात भी हुई, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधियों की पहली औपचारिक भेंट मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी नागरिक असद खान 12 जून को गलती से नियंत्रण रेखा पार कर उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पहुंच गया था, जहां भारतीय सेना ने उसे हिरासत में ले लिया। आवश्यक जांच और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 18 जून को उसे टिटवाल सेक्टर में पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया गया।
हस्तांतरण प्रक्रिया के दौरान एसडीएम करनाह, तहसीलदार करनाह, भारतीय सेना के अधिकारी, 06 महार रेजिमेंट के प्रतिनिधि, करनाह के थाना प्रभारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
भारतीय सेना की चिनार कोर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि असद खान के साथ भारत में मानवीय व्यवहार किया गया, जो भारतीय सेना की मानवता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सेना ने इस अवसर की कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें दोनों देशों के सैन्य अधिकारी हाथ मिलाते नजर आ रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली मुलाकात
भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच यह मुलाकात विशेष महत्व रखती है, क्योंकि मई 2025 में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। ऐसे माहौल में LoC पर अधिकारियों का आमना-सामना और समन्वय मानवीय मामलों में सहयोग का संकेत माना जा रहा है।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदार ठहराया था।
इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” चलाकर पाकिस्तान और पीओके में स्थित कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और सीमा पर कई दिनों तक संघर्ष जैसी स्थिति बनी रही। हालांकि, इस बीच मानवीय आधार पर पाकिस्तानी नागरिक की सुरक्षित वापसी और सैन्य अधिकारियों की मुलाकात ने सकारात्मक संदेश देने का काम किया है।