दैनिक खबरनामा। जम्मू 12 अगस्त: जम्मू-कश्मीर वर्ष 1990 में हुई कश्मीरी पंडित साहित्यकार सरवानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्या के मामले में राज्य जांच एजेंसी ने 36 साल बाद जांच को तेज कर दिया है। बुधवार को एसआईए ने इस पुराने केस से जुड़े सुराग और संदिग्धों की तलाश में जम्मू-कश्मीर के 9 स्थानों पर एक साथ दबिश दी।
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला मूल रूप से अनंतनाग जिले के दूरू पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 45/1990 से जुड़ा हुआ है। अब इस एफआईआर को आधार बनाकर एसआईए आगे की जांच कर रही है।
जम्मू के बागे-बाहू में भी छापा
एसआईए की एक टीम ने जम्मू के बागे-बाहू इलाके की शहबाज कॉलोनी में मोहम्मद असलम के घर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। टीम ने घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य संभावित सबूतों की बारीकी से जांच की। छापेमारी के दौरान क्या-क्या मिला, इस बारे में फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।
कौन थे सरवानंद कौल ‘प्रेमी’
सरवानंद कौल कश्मीर के जाने-माने कवि, लेखक और अनुवादक थे। कश्मीर के प्रसिद्ध शायर महजूर ने उन्हें ‘प्रेमी’ की उपाधि दी थी। उनके नाम दो दर्जन से अधिक पुस्तकें हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण और रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ का कश्मीरी भाषा में अनुवाद किया था।
वह आपसी सौहार्द के पक्षधर थे। 1989 में जब कश्मीरी हिंदुओं का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ, तब भी वह दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग स्थित अपने पैतृक घर में ही रुके रहे। उनका मानना था कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय में उनका कोई विरोधी नहीं है।
कैसे हुई थी हत्या
आतंकियों ने 31 अप्रैल 1990 को सरवानंद कौल को उनके बेटे के साथ अगवा कर लिया था। अपहरण के बाद आतंकियों ने सरवानंद कौल के माथे पर गोली मारी और उनके बेटे की भी हत्या कर दी। पहली मई 1990 को पिता-पुत्र दोनों के शव एक पेड़ से लटके हुए बरामद हुए थे।
अब तीन दशक से अधिक समय बाद एसआईए ने इस केस की फाइल दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच शुरू की है।