उत्तर प्रदेश 5 जनवरी ( दैनिक खबरनामा )गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां वर्ष 2014 बैच का एक एमबीबीएस छात्र पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रथम वर्ष में ही अटका हुआ है। छात्र वर्ष 2015 में प्रथम वर्ष की परीक्षा पास नहीं कर सका था और इसके बाद से न तो उसने दोबारा परीक्षा फॉर्म भरा और न ही किसी परीक्षा में शामिल हुआ।कॉलेज प्रशासन के अनुसार, संबंधित छात्र वर्ष 2014 से लगातार यूजी हॉस्टल में रह रहा है। बीते 11 वर्षों से वह न तो नियमित शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहा है और न ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा है। इसके बावजूद तकनीकी रूप से उसका नामांकन अब तक सक्रिय बना हुआ है।कॉलेज अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा मेडिकल शिक्षा नियमों के तहत प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल छात्र को दोबारा प्रवेश लेने की आवश्यकता नहीं होती। वह केवल परीक्षा फॉर्म भरकर पुनः परीक्षा में शामिल हो सकता है। इसी प्रावधान के चलते कॉलेज प्रशासन छात्र का नामांकन रद्द नहीं कर पा रहा है।स्थिति को सुलझाने के लिए कॉलेज स्तर पर कई बार काउंसलिंग की गई, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। इसके बाद प्रशासन ने छात्र के पिता से संपर्क किया। प्रधानाचार्य कार्यालय की ओर से तीन बार फोन कर उन्हें कॉलेज आने के लिए कहा गया, लेकिन अब तक वे उपस्थित नहीं हुए। अधिकारियों का कहना है कि छात्र के पिता ने उसके शैक्षणिक भविष्य को लेकर खास रुचि नहीं दिखाई है।मामले को और जटिल बनाते हुए, छात्र का सक्रिय नामांकन कॉलेज को उसे हॉस्टल से बाहर करने से भी रोक रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मेस शुल्क परीक्षा फॉर्म के साथ लिया जाता है, लेकिन छात्र ने वर्षों से फॉर्म नहीं भरा है। इसके बावजूद वह हॉस्टल में रहकर मुफ्त भोजन और आवास की सुविधा का लाभ उठा रहा है।कॉलेज प्रशासन ने अब इस असामान्य स्थिति के समाधान के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से मार्गदर्शन मांगा है।बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा, “एनएमसी से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।”