बांदा 7 जनवरी (दैनिक खबरनामा)जनपद के ऐतिहासिक रायफल क्लब खेल मैदान को विकास प्राधिकरण द्वारा नीलाम किए जाने की तैयारी को लेकर जिले की राजनीति में जबरदस्त उबाल आ गया है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही समाजवादी पार्टी (सपा) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे खिलाड़ियों, युवाओं और आम जनता के हितों पर सीधा हमला करार दिया है।सपा और जेडीयू नेताओं का आरोप है कि बांदा के भू-माफिया और विकास प्राधिकरण की नजर अब इस ऐतिहासिक खेल मैदान पर टिकी हुई है। नेताओं ने कहा कि रायफल क्लब मैदान केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि बांदा की पहचान और गौरव है। यह वही मैदान है जहां हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद समेत देश के कई नामचीन खिलाड़ियों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की अनेक ऐतिहासिक रैलियों, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की शुरुआत भी इसी मैदान से हुई है।नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस मैदान की नीलामी होती है तो जनपद के खिलाड़ियों को अभ्यास, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। खेल प्रतिभाओं के विकास पर सीधा असर पड़ेगा और युवाओं के पास खेलने के लिए पर्याप्त मैदान नहीं बचेंगे। साथ ही चुनावी रैलियों, जनसभाओं और बड़े सामाजिक आयोजनों के लिए भी उपयुक्त स्थान की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।इसी मुद्दे को लेकर आज समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में रायफल क्लब मैदान की नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यह फैसला जनहित के खिलाफ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।इस मौके पर बबेरू विधायक विशंभर यादव ने कहा कि रायफल क्लब मैदान बांदा की ऐतिहासिक धरोहर है। इसे बेचने या नीलाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने फैसला वापस नहीं लिया तो समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरकर बड़ा जनआंदोलन करेगी।वहीं जेडीयू प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने भी नीलामी प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह निर्णय खिलाड़ियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि सरकार और विकास प्राधिकरण को चाहिए कि खेल मैदानों को बचाने और विकसित करने पर ध्यान दे, न कि उन्हें बेचने की साजिश रचे।फिलहाल रायफल क्लब मैदान की नीलामी को लेकर पूरा मामला बांदा जनपद की राजनीति का केंद्र बन गया है। अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी है, जबकि विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि मांग न मानी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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