चंडीगढ़ 14 जनवरी(जगदीश कुमार) चंडीगढ़ आवास को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार मानते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी झुग्गी तोड़ने के आदेशों को रद्द कर दिया है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए फ्लैट आवंटन के दावों पर गंभीरता से विचार करे।यह फैसला जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मंचांडा की खंडपीठ ने झुग्गीवासियों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि झुग्गीवासी होने के कारण याचिकाकर्ताओं को चंडीगढ़ स्माल फ्लैट्स स्कीम, 2006 के तहत फ्लैट आवंटन के लिए विचार किए जाने का पूरा अधिकार है।अदालत झुग्गीवासियों ध्रुव और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि वे सभी स्माल फ्लैट्स स्कीम, 2006 के तहत पात्र हैं, इसके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन ने बिना कोई नोटिस जारी किए और बिना सुनवाई का अवसर दिए झुग्गियों को तोड़ने के आदेश पारित कर दिए।याचिका में यह भी बताया गया कि फ्लैट आवंटन के लिए प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजा गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किए गए ध्वस्तीकरण आदेश कानूनन टिकाऊ नहीं हैं और इन्हें निरस्त किया जाना आवश्यक है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह झुग्गीवासियों के पुनर्वास के मुद्दे पर नियमानुसार निर्णय ले।हाईकोर्ट के इस फैसले को झुग्गीवासियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम और राहत भरा कदम माना जा रहा है।
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