नई दिल्ली18 जनवरी ( दैनिक खबरनामा ) नई दिल्ली टाइप-2 डायबिटीज को केवल शुगर की बीमारी मानकर निश्चिंत हो जाना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।पीजीआई (पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट) के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक अहम शोध में सामने आया है कि डायबिटीज धीरे-धीरे हड्डियों को अंदर से कमजोर कर रही है,भले ही सामान्य जांच में हड्डियां मजबूत दिखाई दें शोधकर्ताओं के अनुसार, कई डायबिटीज मरीजों की बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) रिपोर्ट सामान्य पाई जाती है, लेकिन इसके बावजूद उनकी हड्डियों की आंतरिक संरचना कमजोर हो चुकी होती है। ऐसे में गिरने या हल्की चोट लगने पर फ्रैक्चर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक रहता है।विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खासकर रजोनिवृत्ति (पोस्टमेनोपॉजल) के बाद की महिलाओं में यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। हार्मोनल बदलाव और लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर हड्डियों की गुणवत्ता को प्रभावित कर देते हैं, जिससे वे भंगुर हो जाती हैं।डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज मरीजों को यह मानकर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए कि यदि बोन मिनरल डेंसिटी रिपोर्ट ठीक है तो हड्डियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से ट्रैबेक्युलर बोन स्कोर (TBS) जैसी उन्नत जांच करानी चाहिए, जिससे हड्डियों की वास्तविक मजबूती का सही आकलन हो सके।विशेषज्ञों के मुताबिक, शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखना हड्डियों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही कैल्शियम और विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनानी चाहिए। साथ ही गिरने से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।डॉक्टरों ने कहा कि समय रहते सतर्कता और सही जांच से हड्डियों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। डायबिटीज मरीजों को नियमित फॉलोअप और हड्डियों की जांच को भी अपनी उपचार योजना का हिस्सा बनाना चाहिए।
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- Dainik Khabarnama
- December 16, 2025