हरियाणा 27 जनवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा ) हरियाणा के एक छोटे से गांव कसनी में जन्मी और पली-बढ़ी अक्षिता धनकर ने बचपन में पहली बार जब गणतंत्र दिवस की परेड देखी थी, तभी उनके मन में देश की सेवा करने का सपना जन्म ले चुका था। कर्तव्य पथ पर अनुशासित कदमों से मार्च करते सैनिक, आसमान में गर्जना करते लड़ाकू विमान और तिरंगे की शान—इन सबने उनके दिल में एक ऐसा जुनून भरा, जो वर्षों बाद साकार हुआ। आज वही अक्षिता धनकर भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनकर 77वें गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं।यह क्षण न केवल उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, समर्पण और नेतृत्व क्षमता का भी जीवंत प्रतीक है।गांव से आसमान तक का सफर हरियाणा के जाट बहुल क्षेत्र कसनी गांव में जन्मी अक्षिता का बचपन अनुशासन, कर्तव्य और देशभक्ति के वातावरण में बीता। उनके पिता स्वयं भारतीय वायु सेना में सेवाएं दे चुके हैं, जिससे घर में देश सेवा की कहानियां और सैन्य जीवन का अनुशासन स्वाभाविक रूप से उनके जीवन का हिस्सा बन गया। यही संस्कार धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व की नींव बने।शिक्षा के क्षेत्र में भी अक्षिता शुरू से ही मेधावी रहीं। उन्होंने दिल्ली स्थित श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। स्कूली जीवन के दौरान ही उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) जॉइन कर लिया था। एनसीसी में रहते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और समर्पण ने उन्हें कैडेट सार्जेंट मेजर (सीएसएम) जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचाया। यहीं से उनका आत्मविश्वास और भी मजबूत हुआ और भारतीय वायु सेना में जाने का सपना स्पष्ट लक्ष्य में बदल गया।दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम की कहानी सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए अक्षिता ने वायु सेना सामान्य प्रवेश परीक्षा (AFCAT) की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने यह परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका चयन मैसूर स्थित वायु सेना चयन बोर्ड (AFSB) के लिए हुआ, जहां कठोर परीक्षणों और साक्षात्कारों के दौर से गुजरते हुए उनका चयन प्रशासन (ADM) शाखा के लिए कर लिया गया।जून 2023 में अक्षिता धनकर भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन हुईं। उनकी मेहनत, समर्पण और नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम है कि महज तीन वर्षों के भीतर उन्होंने फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद तक का सफर तय कर लिया। यह उपलब्धि किसी भी युवा अधिकारी के लिए गर्व का विषय है।जाट लैंड से कर्तव्य पथ तक जाट बहुल हरियाणा क्षेत्र हमेशा से सशस्त्र बलों में अपने योगदान के लिए जाना जाता रहा है। इसी परंपरा की वाहक हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनकर। उन्होंने बचपन से ही वीरता, सेवा और देशभक्ति की कहानियां सुनीं और उन्हें अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।
अपने अनुभव साझा करते हुए अक्षिता बताती हैं कि कर्तव्य पथ पर खड़े होकर देश का तिरंगा फहराने का सपना उन्होंने बहुत पहले देख लिया था। परेड की भव्यता और उनके पिता के सैन्य अनुभवों ने उन्हें इस राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आज जब वह राष्ट्रपति के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहरा रही थीं, तो वह क्षण उनके लिए भावनाओं से भरा हुआ था—आंखों में गर्व, दिल में कृतज्ञता और मन में देश के लिए समर्पण।नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनकर की यह यात्रा न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि अगर इरादे मजबूत हों, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं।
कसनी गांव की इस बेटी ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों और छोटे गांव की पृष्ठभूमि के बावजूद भी बड़े सपने देखे जा सकते हैं और उन्हें साकार किया जा सकता है। आज उनकी सफलता पर न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा गांव और प्रदेश गर्व महसूस कर रहा है।अक्षिता धनकर की यह उड़ान देश की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो आसमान को छूने का हौसला रखती हैं।

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