चंडीगढ़ 27 जनवरी 2026 (जगदीश कुमार) चंडीगढ़।
चंडीगढ़ में बीते पांच वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद शहर के ऑटोमोबाइल बाज़ार में अब भी पेट्रोल और डीज़ल कारों का वर्चस्व बना हुआ है। रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए), चंडीगढ़ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच इलेक्ट्रिक कारों के पंजीकरण में कई गुना वृद्धि हुई है।आरएलए के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में जहां केवल 123 इलेक्ट्रिक कारों का पंजीकरण हुआ था, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,512 तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और ईवी को भविष्य के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि परंपरागत ईंधन से चलने वाली कारें अब भी खरीदारों की पहली पसंद बनी हुई हैं। अकेले वर्ष 2025 में चंडीगढ़ में 10,805 पेट्रोल कारों और 4,558 डीज़ल कारों का पंजीकरण किया गया। इससे स्पष्ट है कि कुल कार खरीद में पेट्रोल और डीज़ल वाहनों की हिस्सेदारी अभी भी सबसे अधिक है।आरएलए के 2021 से 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि प्रतिशत के लिहाज से इलेक्ट्रिक कारों की वृद्धि दर सबसे तेज़ रही है, लेकिन कुल संख्या के मामले में ईवी अब भी पेट्रोल और डीज़ल वाहनों से काफी पीछे हैं। पेट्रोल कारें लगातार सबसे ज्यादा बिकने वाला विकल्प बनी हुई हैं, जबकि डीज़ल वाहनों की बिक्री में गिरावट के बावजूद उनकी संख्या इलेक्ट्रिक कारों से अधिक बनी हुई है।विशेषज्ञों का मानना है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, वाहन कीमत और लोगों की आदतें अभी भी इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापक प्रसार में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद सरकारी नीतियों, बढ़ती जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ते सरोकारों के चलते आने वाले वर्षों में ईवी की हिस्सेदारी में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही