पंजाब 17 फरवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) पंजाब के मोगा में ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध–2’ अभियान के तहत आयोजित जनसभा को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कार्यक्रम में डीजीपी और मुख्य सचिव की मंच से मौजूदगी और संबोधन पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि सरकार ने राजनीतिक कार्यक्रम में प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया है।शिरोमणि अकाली दल के प्रदेश महासचिव गुरप्रीत सिंह रालू खन्ना ने सवाल उठाया कि यदि यह राजनीतिक रैली थी तो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मंच से भाषण क्यों दे रहे थे? वहीं, अगर यह सरकारी कार्यक्रम था तो फिर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी क्यों रही? उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकारी संसाधनों और करदाताओं के धन का उपयोग पार्टी हित में तो नहीं हुआ।भारतीय जनता पार्टी के पंजाब अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी इसे नौकरशाही के राजनीतिकरण का मामला बताया। उन्होंने अमित शाह को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या देश का ‘स्टील फ्रेम’ राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है? उन्होंने ऑल इंडिया सर्विस नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई।
वहीं, कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि डीजीपी और मुख्य सचिव जैसे पदों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और केंद्र से कार्रवाई की मांग की।दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई से घबराकर विरोध किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार नशे के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि पिछली सरकारों ने इस समस्या को बढ़ावा दिया।
हालांकि, विवाद पर सत्तापक्ष की ओर से अब तक औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।