नई दिल्ली 26 जनवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा )नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के व्यावसायीकरण के सूत्रधार, पूर्व आईएएस अधिकारी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का सोमवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय क्रिकेट प्रशासन के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है।एक दौर ऐसा भी था जब भारतीय क्रिकेटर आर्थिक तंगी से जूझते थे और बीसीसीआई की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर थी। ऐसे समय में एक दूरदर्शी प्रशासक के रूप में सामने आए आईएस बिंद्रा ने क्रिकेट को न सिर्फ नई दिशा दी, बल्कि इसे व्यावसायिक रूप से भी मजबूत बनाया। उन्होंने वर्ष 1993 से 1996 तक बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और इस दौरान भारतीय क्रिकेट के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव किए।नाले पर देखा था स्टेडियम का सपना, मोहाली बना पहचान क्रिकेट जानकारों के अनुसार जिस स्थान पर कभी एक नाला बहता था, वहीं आईएस बिंद्रा ने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का सपना देखा। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) के सहयोग से उन्होंने इस सपने को साकार किया और आज वही मैदान आईएस बिंद्रा क्रिकेट स्टेडियम, मोहाली के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। यह स्टेडियम पंजाब के सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा और अवसर का केंद्र बना।वर्ल्ड कप आयोजन में निभाई अहम भूमिकाआईएस बिंद्रा ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर 1987 और 1996 क्रिकेट वर्ल्ड कप के सफल आयोजन में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली।प्रशासनिक सफर रहा प्रभावशाली बिंद्रा वर्ष 1974 में पटियाला के उपायुक्त रहे और 1975 में पीसीए के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद 1978 में पीसीए अध्यक्ष का पद संभालते हुए उन्होंने पंजाब क्रिकेट की नींव मजबूत की। उनके कार्यकाल में 1993 में मोहाली में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला वनडे मुकाबला खेला गया।पीसीए को बिंद्रा ने खड़ा किया: दिनेश मोंगिया पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिनेश मोंगिया ने कहा कि पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन की असली पहचान बिंद्रा साहब की देन है। उनके मार्गदर्शन में पंजाब से कई ऐसे खिलाड़ी निकले जिन्होंने टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उनकी देन: सिद्धार्थ कॉल पीसीए के पूर्व खिलाड़ी सिद्धार्थ कॉल ने कहा कि कम उम्र में क्रिकेट सीखने के दौरान बिंद्रा सर का मार्गदर्शन बेहद अहम रहा। आज पंजाब से जितने भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर हैं, वे सभी उनकी सोच और मेहनत का परिणाम हैं।पीसीए की पहचान थे बिंद्रा: रीतिंदर सोढीपूर्व भारतीय ऑलराउंडर रीतिंदर सिंह सोढी ने कहा कि पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन की पहचान ही बिंद्रा सर से जुड़ी हुई है। उनका योगदान भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।आईएस बिंद्रा के निधन को भारतीय क्रिकेट प्रशासन के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।