हिमाचल 12 जनवरी ( दैनिक खबरनामा) हिमाचल कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत ब्यास नदी के किनारे सुरक्षा दीवारें लगाने के साथ-साथ पहाड़ियों की मजबूती के लिए व्यापक सुरक्षात्मक कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों से मानसून और बरसात के मौसम में होने वाले भूस्खलन, सड़क कटाव और यातायात बाधाओं की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। वर्ष 2023, 2024 और 2025 में हुए भारी नुकसान के बाद अब फोरलेन को स्थायी रूप से सुरक्षित करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।सबसे अधिक कार्य कुल्लू जिले में प्रस्तावित हैं, जहां करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से ब्यास नदी के किनारे सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। नदी से सटे हिस्सों में आधुनिक तकनीक से मजबूत सुरक्षा दीवारें बनाई जाएंगी। ये दीवारें साढ़े तीन से चार मीटर तक नदी के भीतर गहराई में स्थापित की जाएंगी, ताकि तेज बहाव के दौरान भी सड़क और अन्य ढांचों को नुकसान न पहुंचे। कुल्लू से मनाली के बीच करीब पांच से छह किलोमीटर लंबे हिस्से में नदी किनारे सुरक्षा कार्य प्रस्तावित हैं। यह क्षेत्र भूस्खलन और कटाव की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।बिलासपुर जिले में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा दीवारों के साथ पहाड़ी सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। इनमें पहाड़ियों पर रॉक बोल्टिंग और नेट लगाने जैसे उपाय शामिल हैं, ताकि भूस्खलन के खतरे को कम किया जा सके। वहीं, मंडी जिले के हिस्से में करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां मार्कंडेय मंदिर थलौट के पास नदी किनारे, झलोगी टनल के बाहर आए मलबे की सुरक्षा सहित अन्य कार्य प्रस्तावित हैं।बिलासपुर जिले में गड़ा मोड़ से बलोह तक पांच स्थानों पर सुरक्षा कार्यों की शुरुआत हो चुकी है, जबकि पंडोह से मनाली तक के हिस्से के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 की बरसात में कीरतपुर से मनाली तक फोरलेन पर करीब 40 स्थानों पर भारी नुकसान हुआ था। कुल्लू से मनाली तक कई जगहों पर फोरलेन का नामोनिशान तक मिट गया था, हालांकि अस्थायी रूप से मार्ग को बहाल कर लिया गया है। अब स्थायी सुरक्षा कार्यों पर जोर दिया जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शेष हिस्सों में भी तेजी से काम शुरू कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया मुख्यालय स्तर पर पूरी की जा रही है। अगले मानसून से पहले मुख्य कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष रूप से नदी के भीतर गहराई में होने वाले कार्य जलस्तर बढ़ने से पहले पूरे किए जाएंगे|