चंडीगढ़ 6 जनवरी (दैनिक खबरनामा)शहर में लगातार सामने आ रही दूषित जलापूर्ति और जर्जर सीवरेज व्यवस्था को लेकर सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।एसोसिएशन का कहना है कि चंडीगढ़ को देश के सबसे स्वच्छ और योजनाबद्ध शहरों में गिना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में गंदा, बदबूदार और काले रंग का पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे लोग मजबूरन बीमारियों का खतरा झेल रहे हैं।फेज-1 सेक्टरों में सबसे अधिक खतरा
सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन के अनुसार, चंडीगढ़ के फेज-1 के कई सेक्टरों में जलापूर्ति और सीवरेज की लाइनें 70 साल से भी अधिक पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ ये लाइनें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिसके चलते सीवरेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है। यही वजह है कि आए दिन दूषित और बदबूदार पानी की शिकायतें सामने आती रहती हैं।एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद प्रशासन ने अब तक इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की है। केवल अस्थायी मरम्मत कर मामले को टाल दिया जाता है, जिससे समस्या और भी गंभीर होती जा रही है।स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि दूषित पानी के कारण डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। यदि समय रहते पूरी पाइपलाइन व्यवस्था को बदला नहीं गया तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने मांग की है कि फेज-1 के सभी पुराने सेक्टरों में जलापूर्ति और सीवरेज लाइनों का तुरंत सर्वे कराया जाए और चरणबद्ध तरीके से नई पाइपलाइन डाली जाए। साथ ही, जल गुणवत्ता की नियमित जांच और पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे जनहित में आंदोलन और कानूनी विकल्प अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।