चंडीगढ़ 19 जनवरी (जगदीश कुमार) चंडीगढ़।आंकड़ों पर गौर करें तो साफ़ हो जाता है कि शहर के जूनियर फुटबॉल को गंभीर प्रोत्साहन की आवश्यकता है। स्थानीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और उनके खेल स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अब दूसरे राज्यों की मज़बूत टीमों के साथ नियमित प्रतिस्पर्धा बेहद ज़रूरी हो गई है।यूटी प्रशासन द्वारा 20वीं ऑल इंडिया एडमिनिस्ट्रेटर अंडर-17 चैलेंज फुटबॉल कप के आयोजन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं, जो 20 जनवरी से शुरू होगा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में शहर का प्रतिनिधित्व केवल दो स्थानीय टीमें ही करेंगी। यह स्थिति तब है, जब पिछले अक्टूबर में यूटी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अंडर-17 इंटर-स्कूल फुटबॉल प्रतियोगिता में शहर की कुल 44 टीमों ने भाग लिया था, जिनमें से 12 टीमें सरकारी स्कूलों की थीं।शनिवार तक टूर्नामेंट में केवल एक स्थानीय टीम चंडीगढ़ फुटबॉल अकादमी (जो इस प्रतियोगिता की मेज़बान भी है) ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की थी। रविवार को संधू एफसी ने भी एंट्री कन्फर्म की, लेकिन इसके अलावा किसी अन्य स्थानीय टीम ने रुचि नहीं दिखाई।शहर में सैकड़ों निजी और सरकारी स्कूल, एक स्थानीय फुटबॉल संघ (जिससे कई क्लब जुड़े हैं) और कई निजी फुटबॉल अकादमियां मौजूद हैं। इसके बावजूद केवल दो टीमों का आगे आना, शहर के फुटबॉल ढांचे और प्रतियोगी मानसिकता पर सवाल खड़े करता है। यह टूर्नामेंट आमंत्रण आधारित है और युवा खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा मंच माना जाता है।
टीम चयन के लिए हुए ट्रायल्स में खिलाड़ियों की संख्या इतनी अधिक थी कि शिक्षा विभाग को वीडियोग्राफी करवानी पड़ी और फिटनेस टेस्ट के स्पष्ट मानक तय करने पड़े, ताकि अंतिम चयन को लेकर किसी तरह का विवाद न हो।
हालांकि स्थानीय अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन अलग-अलग स्तर के कोचों का कहना है कि स्कूल और क्लब अक्सर ऐसे उच्च स्तरीय टूर्नामेंट से दूरी बना लेते हैं, क्योंकि दूसरे राज्यों की टीमें पहले से बेहतर तैयारी के साथ आती हैं।एक स्थानीय स्कूल में प्रशिक्षण देने वाले युवा कोच ने बताया,इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमें लगभग पेशेवर स्तर पर खेलती हैं। उनके खिलाड़ी साल भर फुटबॉल का अभ्यास करते हैं, जबकि चंडीगढ़ में अधिकांश खिलाड़ी और टीमें सिर्फ कुछ खास समय पर ही अभ्यास करती हैं। चूंकि यह आयु-वर्ग की प्रतियोगिता है, इसलिए कई खिलाड़ी नेशनल और इंटर-स्कूल मुकाबलों के बाद पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए खेल से दूरी बना लेते हैं।”एक अन्य कोच ने कहा,चंडीगढ़ में क्लब और टूर्नामेंट संस्कृति की कमी है। इस प्रतियोगिता में भी एक टीम पूरी तरह फुटबॉल के लिए समर्पित है, जबकि दूसरी टीम अभी भी कोचों से अच्छे खिलाड़ियों के नाम मांग रही है। दूसरे राज्यों की टीमों के साथ खेलने के लिए लंबी और व्यवस्थित तैयारी चाहिए, साथ ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का एक मजबूत समूह चाहिए — जो तमाम सुविधाएं होने के बावजूद चंडीगढ़ के पास नहीं है।शिक्षा विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ कोच ने सुझाव देते हुए कहा“स्थानीय कोचिंग सेंटर्स की प्रतिभा को एक टीम में जोड़कर तैयारी की जा सकती है, लेकिन सिर्फ भाग लेने के लिए नहीं, बल्कि जीत के लक्ष्य के साथ टीमों को प्रशिक्षित करना होगा।कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चंडीगढ़ के जूनियर फुटबॉल को आगे बढ़ाना है, तो नियमित प्रतिस्पर्धा, पेशेवर तैयारी और मजबूत टूर्नामेंट संस्कृति विकसित करना अनिवार्य होगा। तभी स्थानीय खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना पाएंगे।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

चंडीगढ़ में ऊंची इमारतों का रास्ता साफ, FAR बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा

चंडीगढ़ 20 जनवरी( जगदीश कुमार) चंडीगढ़ दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम की तर्ज…
Share to :

पंजाब पुलिस में 3298 पदों पर भर्ती, 10 मार्च से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

पंजाब 6 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़: पंजाब पुलिस विभाग ने…
Share to :

चुनावी साल से पहले पंजाब कांग्रेस में घमासान, प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर तेज हुई सियासी जंग

चंडीगढ़ 22 जनवरी (जगदीश कुमार )चंडीगढ़।2027 विधानसभा चुनाव से पहले ही पंजाब…
Share to :

हौसले की उड़ान आईसीयू से सीधे एग्जाम हॉल पहुंची चंडीगढ़ की कनिष्का, स्ट्रेचर पर दिया फिजिक्स का पेपर

चंडीगढ़ 21 फरवरी 2026 (दैनिक खबरनामा ) Chandigarh की 17 वर्षीय छात्रा…
Share to :