पंजाब 14 जनवरी( दैनिक खबरनामा) पंजाब के होशियारपुर जिले का लांबरा कांगड़ी गांव आज पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है। यहां पिछले करीब दस वर्षों से 44 परिवारों ने एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल पूरी तरह छोड़ दिया है और गोबर से बनने वाली बायोगैस से खाना बना रहे हैं।वर्ष 2016 में लांबरा कांगड़ी मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी की पहल पर गांव में एक सामुदायिक बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया था। यह प्लांट प्रतिदिन करीब 2,500 किलोग्राम पशु गोबर को प्रोसेस करता है, जिससे मीथेन गैस तैयार की जाती है। इस गैस को पाइपलाइन के जरिए सीधे गांव के 44 घरों तक पहुंचाया जाता है।बायोगैस अपनाने से ग्रामीणों का मासिक ईंधन खर्च घटकर केवल 200 से 300 रुपये रह गया है, जबकि पहले एक एलपीजी सिलेंडर पर 700 रुपये से अधिक खर्च करना पड़ता था।इस अनूठी पहल की सोच गांव के निवासी जसविंदर सिंह सैनी को तब आई, जब वे एक अध्ययन दौरे पर दक्षिण कोरिया गए। वहां उन्होंने कचरे से ऊर्जा बनाने की आधुनिक प्रणालियों को देखा। गांव लौटने के बाद उन्होंने महसूस किया कि पशु गोबर नालियों में जमा होकर गंदगी और जलभराव की समस्या पैदा कर रहा है।बायोगैस प्लांट की स्थापना से न सिर्फ रसोई का ईंधन सस्ता हुआ, बल्कि गांव की स्वच्छता में भी बड़ा सुधार आया है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरी है।