नई दिल्ली 11 जनवरी (दैनिक खबरनामा) नई दिल्लीभारत सरकार के औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए भारतीय रेलवे ने एक अहम फैसला लिया है। शुक्रवार को रेलवे ने घोषणा की कि अब बंद गले का काला कोट भारतीय रेलवे के अधिकारियों की आधिकारिक पोशाक का हिस्सा नहीं रहेगा। यह पोशाक ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही थी। अब इसकी जगह स्वदेशी वस्त्रों को अपनाया जाएगा।इसके साथ ही रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेलवे के प्रभागों और अन्य संस्थानों के वे अंग्रेजी नाम, जो ब्रिटिश शासन के दौरान रखे गए थे, उन्हेंभारतीय नामों से बदला जाएगा। इस क्रम में वाल्टेयर रेलवे प्रभाग का नाम बदलकर विशाखापत्तनम रेलवे प्रभाग किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। उल्लेखनीय है कि वाल्टेयर एक फ्रांसीसी लेखक थे, जिन्हें यूरोपीय ज्ञानोदय आंदोलन का प्रमुख व्यक्तित्व माना जाता है।केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक पुरस्कार समारोह के दौरान रेलवे की नई पहल और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेलवे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक विकसित और आधुनिक रेल प्रणाली तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके लिए नए मानक तय किए जाएंगे।रेल मंत्री ने यह भी बताया कि रेलवे अपने कर्मचारियों के कौशल विकास और पदोन्नति व्यवस्था में बदलाव करेगा। सेना की तर्ज पर पहले कर्मचारियों से उनके कार्य का व्यावहारिक मूल्यांकन किया जाएगा, इसके बाद उनके कौशल को निखारने और पदोन्नति पर निर्णय लिया जाएगा।नवाचार को मिलेगा बढ़ावा, 12 नए पुरस्कार होंगे शुरू रेलवे में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। अगले वर्ष से नवाचार के लिए 12 नए पुरस्कार शुरू किए जाएंगे। इसके लिए एक विशेष पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा। इस पोर्टल पर चयनित सर्वश्रेष्ठ नवाचारों को करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। यदि परियोजना सफल रही तो संबंधित नवाचारकर्ताओं को चार वर्षों तक कार्य करने का अवसर भी मिलेगा।रेलवे का मानना
है कि इन पहलों से न केवल कार्यसंस्कृति में सुधार होगा, बल्कि भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय बनाने में भी मदद मिलेगी।