चंडीगढ़ 27 दिसम्बर (जगदीश कुमार)अगर आप हरियाणा में सुबह घर से निकलते हैं और किसी भी दिशा में गाड़ी मोड़ते हैं, तो कुछ ही दूरी तय करने के बाद सामने एक टोल प्लाजा नजर आ जाता है। कुछ किलोमीटर आगे बढ़ते ही दूसरा और फिर तीसरा टोल—यह नज़ारा अब अपवाद नहीं, बल्कि हरियाणा की सड़कों की पहचान बन चुका है। यही वजह है कि राज्य में यात्रा करने वाले लोगों के मन में बार-बार सवाल उठता है कि क्या देश में सबसे ज्यादा टोल हरियाणा में ही हैं?इस सवाल का जवाब सीधा नहीं है। असल सच्चाई यह है कि हरियाणा में टोल प्लाजा की संख्या से ज्यादा समस्या उनकी आपसी दूरी है। देशभर में एक टोल प्लाजा के बीच औसतन 60 किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी मानी जाती है, जबकि हरियाणा में यह औसत घटकर करीब 45 किलोमीटर रह जाता है। यह पूरे देश में सबसे कम दूरी मानी जा रही है।कम दूरी का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है। कम फासले में बार-बार टोल चुकाने की मजबूरी के कारण यहां सफर करने वालों को टोल का बोझ ज्यादा महसूस होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा दिल्ली-एनसीआर से सटा होने और राष्ट्रीय राजमार्गों के घने नेटवर्क के कारण टोल का घनत्व काफी ज्यादा है।यानी साफ है कि हरियाणा में परेशानी टोल की संख्या नहीं, बल्कि टोल प्लाजा का अत्यधिक घनत्व है। यही वजह है कि राज्य में सफर करते समय लोगों को लगता है कि हर रास्ते पर टोल ही टोल हैं और यात्रा महंगी पड़ रही
