हिमाचल प्रदेश(जगदीश कुमार)हिमाचल हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पदोन्नति के लिए लागू मौजूदा बी-1 टेस्ट प्रणाली में पाई गई खामियों और विसंगतियों को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन के आदेश दिए हैं। यह समिति हेड कांस्टेबल के पदों पर पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया की गहन समीक्षा करेगी और आवश्यक सुधारों पर अपनी सिफारिशें देगी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित होना अत्यंत आवश्यक है। अदालत के संज्ञान में यह बात आई कि वर्तमान बी-1 टेस्ट प्रणाली को लेकर कई अभ्यर्थियों ने असंतोष और आपत्तियां जताई हैं, जिससे विभागीय स्तर पर असमानता और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
अदालत के आदेश के अनुसार, इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता प्रधान सचिव (गृह) हिमाचल प्रदेश करेंगे। समिति में पुलिस विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जो पदोन्नति से जुड़े सभी पहलुओं—जैसे पात्रता मानदंड, परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और मेरिट निर्धारण—का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
हाईकोर्ट ने समिति को यह भी निर्देश दिए हैं कि वह जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का विश्लेषण करे और ऐसी व्यवस्था सुझाए जिससे भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय न हो। समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार पदोन्नति प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव कर सकती है।इस फैसले को पुलिस विभाग के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि योग्य और अनुभवी कर्मचारियों को समय पर उचित अवसर भी मिल सकेगा।