चंडीगढ़ 21 फरवरी 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ की शिक्षा व्यवस्था का एक चिंताजनक पक्ष सामने आया है। शहर में कुल 115 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 44 को सीनियर सेकेंडरी स्तर तक अपग्रेड किया जा चुका है। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि कई स्कूल बिना नियमित प्रिंसिपल और विषय विशेषज्ञ लेक्चररों के ही संचालित हो रहे हैं, जिससे 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।जीएमएसएसएस सेक्टर-39, जीएसएसएस कैंबवाला,जीएमएसएसएस-56,जीएमएसएसएस-45सी, जीएमएसएसएस-28, जीएमएसएसएस मलोया और मौलीजागरां सहित कई स्कूलों में प्रिंसिपल का पद स्वीकृत ही नहीं है। इन स्कूलों को 12वीं तक तो कर दिया गया, लेकिन न तो आवश्यक पद सृजित किए गए और न ही सभी विषयों के लेक्चरर नियुक्त किए गए। हाल ही में 9 प्रिंसिपलों को प्रमोशन दिया गया है, पर जिन स्कूलों में पद ही स्वीकृत नहीं हैं, वहां स्थायी व्यवस्था अब भी अधूरी है।सेक्टर-39 के स्कूल में इतिहास और हिंदी के लेक्चरर नहीं हैं, जबकि केवल अंग्रेजी का एक लेक्चरर कार्यरत है। कैंबवाला स्कूल में करीब 1500 विद्यार्थी डबल शिफ्ट में पढ़ते हैं, लेकिन फिजिकल एजुकेशन, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री के विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं। 11वीं-12वीं की कक्षाएं जेबीटी शिक्षक संभाल रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को विषयों की गहराई से समझ नहीं मिल पा रही।वर्ष 2013 में शिक्षा विभाग ने 186 पद सृजित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, जो 12 वर्ष बाद भी स्वीकृत नहीं हो पाया। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, कॉमर्स, इतिहास, पॉलिटिकल साइंस और फिजिकल एजुकेशन सहित कई विषयों के पद शामिल थे।
हालांकि पिछले वर्ष 22 साल बाद 98 पीजीटी पदों पर भर्ती निकाली गई और लगभग 80 लेक्चररों ने जॉइन भी किया। 218 जेबीटी और 104 टीजीटी पदों पर भी नियुक्तियां हुईं, लेकिन सीनियर सेकेंडरी स्तर पर विषय विशेषज्ञों की कमी अब भी बनी हुई है।चंडीगढ़ टीचर यूनियन और जेएसी ने नियमों के अनुपालन पर सवाल उठाए हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब लेक्चरर ही प्रिंसिपल का काम संभालेंगे तो कक्षाएं कैसे नियमित चलेंगी। निजी ट्यूशन का सहारा लेने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल शर्मा का कहना है कि प्रिंसिपलों का प्रमोशन और प्रशिक्षण प्रक्रिया जारी है तथा शिक्षकों की कमी को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।