चंडीगढ़ 16 फरवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) चंडीगढ़ डिलीवरी के कुछ ही घंटों बाद जब नवजात को इंजेक्शन या ब्लड सैंपल के लिए सुई लगाई जाती है, तो मां के लिए वह पल बेहद भावुक और चिंताजनक होता है। अब इस दर्द को कम करने को लेकर एक अहम वैज्ञानिक अध्ययन ने नई उम्मीद जगाई है। Postgraduate Institute of Medical Education and Research (पीजीआई) की अगुवाई में हुई स्टडी में सामने आया है कि सुई लगाते समय स्तनपान नवजात के लिए सबसे प्रभावी और सुरक्षित दर्द निवारक उपाय है।इस शोध में All India Institute of Medical Sciences (एम्स, नई दिल्ली) और Jawaharlal Institute of Postgraduate Medical Education and Research (जिपमेर, पुडुचेरी) के विशेषज्ञ भी शामिल रहे। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल Journal of Vascular Access में प्रकाशित हुआ है।पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले जन्म लेने वाले (प्रीमेच्योर) शिशुओं को कई बार दर्दनाक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। शोध में पाया गया कि इंजेक्शन से पहले यदि शिशु को 0.2 से 0.3 एमएल मां का दूध दिया जाए या स्तनपान कराया जाए, तो दर्द में उल्लेखनीय कमी आती है। दूध की प्राकृतिक मिठास मस्तिष्क को आराम का संकेत देती है, जिससे दर्द का प्रभाव घटता है।शोधकर्ताओं ने पिछले दो दशकों के 95 अध्ययनों की समीक्षा कर 37 क्लिनिकल ट्रायल्स का विश्लेषण किया। नेटवर्क मेटा-एनालिसिस में स्तनपान को वेनिपंक्चर के दौरान सबसे प्रभावी उपाय पाया गया, जबकि नॉन-न्यूट्रिटिव सकिंग (पैसिफायर) दूसरे स्थान पर रहा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह सरल, सुरक्षित और हर अस्पताल में लागू किया जा सकने वाला तरीका नवजात देखभाल में बड़ा बदलाव ला सकता है—क्योंकि कई बार सबसे बड़ी दवा, मां का स्पर्श ही होता है।
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