दैनिक खबरनामा 5 मई 2026 चंडीगढ़ शहर में विकास और सुधारों की चर्चाओं के बीच प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इंडस्ट्रियल प्लॉटों को कमर्शियल (रिटेल) में बदलने और गांवों में लैंड यूज चेंज (CLU) की अनुमति फिलहाल नहीं दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह के बदलाव न तो व्यावहारिक हैं और न ही शहर की योजना के अनुरूप।
प्रशासन का मानना है कि चंडीगढ़ के गांवों में जमीन छोटे-छोटे और बिखरे हुए टुकड़ों में बंटी हुई है, जिससे बड़े स्तर पर विकास संभव नहीं हो पाता। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित करना आर्थिक रूप से भी घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
कानूनी अड़चनें भी इस फैसले की बड़ी वजह हैं। गांवों पर पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट, 1952 और मास्टर प्लान-2031 के कड़े नियम लागू हैं, जो लैंड यूज में बदलाव की अनुमति नहीं देते। इसके अलावा, यदि इंडस्ट्रियल क्षेत्रों को कमर्शियल में बदला गया, तो ट्रैफिक, पार्किंग और अन्य नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।गौरतलब है कि साल 2005 में एक नीति के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में दो कनाल या उससे बड़े प्लॉटों को कमर्शियल उपयोग में बदलने की अनुमति दी गई थी। इससे प्रशासन को अच्छा राजस्व भी मिला था। हालांकि, मास्टर प्लान-2031 में स्पष्ट किया गया है कि इस नीति को दोबारा लागू नहीं किया जाएगा।
फिलहाल प्रशासन शहर के औद्योगिक स्वरूप को बनाए रखने के पक्ष में है और इंडस्ट्रियल इकाइयों को उसी रूप में सुरक्षित रखने की योजना पर कायम है।