दैनिक खबरनामा | 8 जून, 2026
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sukhendu Sekhar Roy ने अपनी राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने हालिया विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह जनादेश टीएमसी के 15 वर्षों के शासन के प्रति जनता की नाराजगी का परिणाम है।
रॉय ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में राज्य में भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे, स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां, औद्योगिक विकास की कमी, कानून-व्यवस्था की समस्याएं तथा रोजगार के सीमित अवसर जैसे मुद्दे लगातार गंभीर होते गए। उन्होंने कहा कि जनता के फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने अपने पद और पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है।
अपने बयान में उन्होंने नई भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि राज्य के विकास और पुनर्निर्माण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
आरजी कर मामले का भी किया उल्लेख
इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सुखेंदु शेखर रॉय ने चर्चित आरजी कर अस्पताल मामले का जिक्र करते हुए टीएमसी नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सत्ता के लंबे दौर के कारण पार्टी नेतृत्व में जवाबदेही की कमी दिखाई देने लगी थी।
टीएमसी में बढ़ सकती है अंदरूनी हलचल
रॉय का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं पहले से जारी हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के कुछ नेता और जनप्रतिनिधि नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असहमति रखते हैं।
इस बीच, पार्टी से निष्कासित विधायक Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले समूह की गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, यह गुट पार्टी नेतृत्व की रणनीति और चुनावी प्रदर्शन को लेकर सवाल उठा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा टीएमसी के भीतर चल रही असंतोष की चर्चाओं को और बल दे सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटनाक्रम का पश्चिम बंगाल की राजनीति और टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ता है।