दैनिक खबरनामा। शिमला, 13 जून:  केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुए पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों में भाजपा को मिला व्यापक जनसमर्थन राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता के बढ़ते असंतोष का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने इसे प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के विरुद्ध जनमत संग्रह बताते हुए कहा कि यह जनादेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जारी विकास यात्रा पर जनता के विश्वास को भी दर्शाता है।

शनिवार को शिमला के होलीडे होम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नड्डा ने केंद्र सरकार के 12 वर्षों के विकास कार्यों, हिमाचल को मिले केंद्रीय सहयोग तथा प्रदेश सरकार की कथित प्रशासनिक विफलताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के विकास, पुनर्निर्माण और जनकल्याण के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी है। विशेष सहायता योजना के तहत प्रदेश को 2,381 करोड़ रुपये, एनडीआरएफ के माध्यम से 2,006 करोड़ रुपये तथा बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 2,150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई है।

नड्डा ने बताया कि प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रगति पर हैं। रेलवे क्षेत्र में रिकॉर्ड 2,911 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और 13,168 करोड़ रुपये की लागत वाली चार प्रमुख रेल परियोजनाओं पर कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना, वंदे भारत ट्रेन, आईआईआईटी ऊना, आईआईएम सिरमौर, स्मार्ट सिटी मिशन, रेणुका जी बांध और लुहरी परियोजना जैसे विकास कार्य केंद्र सरकार की हिमाचल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए नड्डा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) के तहत स्वीकृत 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक ही पूरा हो पाया है। वहीं 12 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स में से केवल एक तैयार हुई है, जबकि 73 स्वीकृत ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में से एक भी शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत 521 करोड़ रुपये में से लगभग आधी राशि खर्च ही नहीं की गई।

प्रदेश प्रशासन पर निशाना साधते हुए नड्डा ने कहा कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहे हैं, जो सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की वास्तविक बागडोर शिमला के बजाय दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के माध्यम से संचालित की जा रही है।

बल्क ड्रग पार्क परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2022 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी, लेकिन राज्य सरकार की धीमी कार्यप्रणाली के कारण इसकी प्रक्रिया में लगभग तीन वर्ष की देरी हुई। केंद्र द्वारा स्वीकृत 1,000 करोड़ रुपये की सहायता में से जारी 225 करोड़ रुपये में केवल 102.13 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके। उनके अनुसार इससे संभावित निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के अवसर प्रभावित हुए हैं।

मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना पर भी नड्डा ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि 100 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को फरवरी 2022 में मंजूरी मिली थी, लेकिन अक्टूबर 2024 में राज्य सरकार स्वयं इससे पीछे हट गई। इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार द्वारा जारी 30 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी वापस करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल को राष्ट्रीय विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर हाथ से निकल गया।

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