दैनिक खबरनामा। शिमला, 13 जून: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने स्कूल समय के बाद जनगणना कार्यों में ड्यूटी लगाए जाने का कड़ा विरोध जताया है। शनिवार को राजकीय अध्यापक संघ और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के बीच हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। संघ ने स्पष्ट कहा कि शिक्षक स्कूल समय के बाद या अवकाश के दिनों में अतिरिक्त सरकारी कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किए जा सकते। यदि प्रशासन का रवैया नहीं बदला तो शिक्षक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में सोमवार को कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है। राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने सुझाव दिया कि जनगणना जैसे कार्य गैर-सरकारी एजेंसियों से करवाए जाएं और शिक्षकों की भूमिका केवल पर्यवेक्षण तक सीमित रखी जाए।
चुनाव ड्यूटी के बाद निलंबन पर भी उठाए सवाल
संघ ने पंचायत चुनावों के दौरान हुई छोटी-मोटी त्रुटियों के आधार पर शिक्षकों के निलंबन को अनुचित बताया। प्रतिनिधियों ने मांग की कि निलंबित शिक्षकों को तत्काल बहाल किया जाए। इसके अलावा खराब परीक्षा परिणामों के आधार पर शिक्षकों की वेतनवृद्धि रोकने के फैसले को भी वापस लेने की मांग की गई।
सीबीएसई स्कूलों में स्थायित्व की मांग
संघ ने सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को कम से कम एक शैक्षणिक वर्ष तक उसी विद्यालय में बनाए रखने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि शिक्षकों का मूल्यांकन उनके परीक्षा परिणामों के आधार पर किया जाए और निर्धारित मानकों से कम प्रदर्शन करने वालों को ही बदला जाए। इस विषय पर सरकार से 10 दिनों के भीतर निर्णय लेने की मांग की गई है।
सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और तबादला प्रतिबंध हटाने की मांग
बैठक में शिक्षकों ने सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग रखी। साथ ही स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध को हटाने और वर्ष में कम से कम एक बार तबादलों का अवसर देने की बात कही, ताकि दूरदराज क्षेत्रों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को भी राहत मिल सके।
कंप्यूटर फीस का भी किया विरोध
संघ ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से ली जा रही कंप्यूटर शिक्षा शुल्क का भी विरोध किया। वीरेंद्र चौहान ने कहा कि विद्यार्थियों से प्रति माह 110 रुपये की फीस लेना उचित नहीं है और सरकार को इसमें छूट प्रदान करनी चाहिए।
इन प्रमुख मांगों पर हुई चर्चा
बैठक में 39 सूत्रीय मांग-पत्र के तहत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें स्थानांतरण नीति में 30 किलोमीटर की दूरी सीमा को घटाकर 15 किलोमीटर करना, सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों के चयन पर शीघ्र निर्णय, लंबित वेतन एरियर और महंगाई भत्ते का भुगतान, विभिन्न श्रेणियों की लंबित पदोन्नतियों को पूरा करना तथा स्थानांतरण प्रतिबंध हटाना शामिल रहा।
इसके अलावा टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नतियों में तेजी लाने, एमफिल एवं पीएचडी धारक शिक्षकों को अतिरिक्त वेतनवृद्धियां देने तथा कॉलेज कैडर में स्कूल कैडर से 25 प्रतिशत पदोन्नति सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
जुलाई में होगी उच्चस्तरीय बैठक
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने संघ की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए अधिकांश मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया। उन्होंने जुलाई के प्रथम सप्ताह में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और संघ प्रतिनिधियों की संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में मांग-पत्र के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा
बैठक के बाद संघ की कार्यकारिणी एवं कार्यपरिषद की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से 70 से अधिक शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान वर्ष 2026-29 के सदस्यता अभियान, संगठनात्मक चुनावों और शिक्षकों से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में राज्य महासचिव तिलक नायक, वित्त सचिव सुनील शर्मा, राजेश गौतम, पालम शर्मा, राकेश संधू, वीरभद्र नेगी, तारा चंद शर्मा, सचिन जसवाल, डॉ. संजय चौधरी और सूरज नायक सहित विभिन्न जिलों के शिक्षक नेता उपस्थित रहे।