दैनिक खबरनामा व चंडीगढ़, 17 जून :  पंजाब में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराए जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2027 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना और विधानसभा चुनावों के संभावित टकराव को देखते हुए चुनाव आयोग समयपूर्व चुनाव कराने के विकल्प पर विचार कर सकता है। ऐसी स्थिति में फरवरी 2027 के बजाय नवंबर या दिसंबर 2026 में ही पंजाब सहित कुछ अन्य राज्यों में मतदान कराया जा सकता है।

हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावित परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।

जनगणना और चुनाव के बीच टकराव की आशंका

वर्ष 2027 की जनगणना दो चरणों में प्रस्तावित है। पहले चरण में हाउस लिस्टिंग का कार्य होगा, जबकि दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण ‘पॉपुलेशन एन्यूमरेशन’ का आयोजन फरवरी 2027 में किया जाएगा। इसी दौरान जातीय जनगणना भी कराई जानी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना और विधानसभा चुनाव दोनों बड़े प्रशासनिक कार्य हैं, जिनके लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में दोनों प्रक्रियाओं का एक ही समय पर होना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

चुनावी मोड में दिख रही आम आदमी पार्टी

संभावित समयपूर्व चुनावों को देखते हुए सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पहले से ही चुनावी मोड में नजर आ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हाल ही में दावा कर चुके हैं कि उन्हें जानकारी मिली है कि पंजाब में चुनाव फरवरी 2027 के बजाय नवंबर 2026 में कराए जा सकते हैं।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और मुख्यमंत्री भगवंत मान को दोबारा सत्ता में लाने के लिए अभी से पूरी ताकत लगाने का आह्वान किया है। इसके बाद से पार्टी की जनसभाओं और संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा भी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार होने की बात कह चुके हैं।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी संभावित समयपूर्व चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। हालिया बैठकों में केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का 20 जून को पंजाब दौरा भी प्रस्तावित है। शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद भाजपा पहली बार राज्य में पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि चुनाव समय से पहले होते हैं तो मजबूत संगठन और सक्रिय कार्यकर्ता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

संभावित चुनावी बदलावों को देखते हुए कांग्रेस भी अपनी रणनीति को लेकर मंथन में जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने और चुनावी समीकरणों पर लगातार विचार-विमर्श कर रहा है।

जनगणना और चुनाव एक साथ होने की स्थिति में प्रशासनिक मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसी वजह से समयपूर्व चुनाव कराने के विकल्प को व्यावहारिक माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के स्तर पर ही लिया जाएगा।

यदि चुनाव निर्धारित समय से पहले कराए जाते हैं तो आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना है, और सभी दल चुनावी अभियान को और तेज कर सकते हैं।

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