दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 20 जून : शहर के भविष्य के विकास और उसकी विशिष्ट पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अगले सप्ताह बड़ा फैसला हो सकता है। चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक कर चंडीगढ़ मास्टर प्लान (सीएमपी) में प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
बैठक का मुख्य विषय शहर में ऊंची इमारतों (हाईराइज बिल्डिंग्स) को अनुमति देने का प्रस्ताव होगा। बढ़ती आबादी और सीमित भूमि उपलब्धता को देखते हुए प्रशासन वर्टिकल डेवलपमेंट यानी ऊंचाई की दिशा में विस्तार का पक्ष रखेगा।
प्रस्तावित संशोधनों में भवनों की ऊंचाई, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और मिश्रित भूमि उपयोग (एमएलयू) से जुड़े अहम बदलाव शामिल हैं। प्रशासन फेज-3, परिधीय सेक्टरों और कुछ अन्य क्षेत्रों में एफएआर को मौजूदा 1.2 से बढ़ाकर 3.0 तक करने का प्रस्ताव रखेगा, जिससे एक ही भूखंड पर लगभग तीन गुना अधिक निर्माण संभव हो सकेगा।
98 फीट तक हो सकती है भवनों की ऊंचाई
मास्टर प्लान में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 30 मीटर (करीब 98.5 फीट) निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर शहर में आठ से दस मंजिला इमारतों के निर्माण का रास्ता खुल जाएगा। साथ ही ग्राउंड कवरेज को बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक करने की भी योजना है।
मलोया के निकट प्रस्तावित पॉकेट-7 क्षेत्र में लगभग 250 व्यक्ति प्रति एकड़ (पीपीए) की घनत्व के साथ हाईराइज आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं। अनुमान है कि यहां करीब 45 हजार लोगों को बसाया जा सकेगा। वहीं मनीमाजरा के पॉकेट-6 में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला भवनों को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है।
औद्योगिक क्षेत्रों को भी मिलेगी राहत
औद्योगिक क्षेत्रों में भी नियमों में ढील देने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार इंडस्ट्रियल एरिया में एफएआर को 2.0 तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा 60 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज और दो कनाल तक के प्लॉटों पर 68 फीट 3 इंच तक ऊंचाई की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है। औद्योगिक संगठनों का मानना है कि इन बदलावों से शहर में एमएसएमई क्षेत्र को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्र का होगा विस्तार
प्रशासन शहर में मिश्रित भूमि उपयोग (एमएलयू) क्षेत्र बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रहा है। वर्तमान में यह क्षेत्र 252 एकड़ (0.89 प्रतिशत) है, जिसे बढ़ाकर 428 एकड़ (1.5 प्रतिशत) किए जाने का प्रस्ताव है।
इसके तहत लगभग 176 एकड़ नए क्षेत्र एमएलयू श्रेणी में शामिल किए जाएंगे। इनमें पंजाब सीमा की ओर डेवलपमेंट रूट कॉरिडोर का 1.5 किलोमीटर विस्तार, सेक्टर-43 स्थित सब-सिटी सेंटर के आसपास लगभग 78 एकड़ क्षेत्र और इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 की करीब 60 एकड़ भूमि शामिल है।
प्रस्तावों पर उठ रहे हैं सवाल
प्रस्तावित बदलावों को लेकर विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि भवनों की ऊंचाई, एफएआर और ग्राउंड कवरेज में भारी वृद्धि शहर की मूल अवधारणा ‘सन, स्पेस एंड वर्डोर’ से समझौता करेगी। उन्होंने भवन उपनियमों में स्टिल्ट फ्लोर से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
पूर्व प्रशासनिक वास्तुविदों, शहरी योजनाकारों और विरासत संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची इमारतों के निर्माण से पानी, सीवरेज, ट्रैफिक और पार्किंग जैसी आधारभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि अनियंत्रित वर्टिकल विकास शहर की विशिष्ट वास्तुकला और हरित स्वरूप को प्रभावित कर सकता है।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) और विभिन्न नागरिक संगठनों ने भी संशोधन प्रक्रिया में पर्याप्त जनभागीदारी नहीं होने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मौजूदा आधारभूत ढांचा बढ़ती आबादी और घनत्व का भार वहन करने में सक्षम है या नहीं।
चूंकि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए मास्टर प्लान में किसी भी बड़े संशोधन पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को ही लेना है। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली आगामी बैठक यह तय करेगी कि प्रस्तावित बदलाव मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ेंगे या विभिन्न पक्षों की आपत्तियों के आधार पर इनमें संशोधन किया जाएगा।