दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 20 जून : पंजाबियों को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के बाद चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र मल्होत्रा राजनीतिक और संगठनात्मक दबाव का सामना कर रहे हैं। एक कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा कही गई टिप्पणी—”जो पंजाबी होते हैं, वे इमोशनली ब्लडी फूल होते हैं”—अब भाजपा के भीतर और बाहर दोनों जगह विवाद का कारण बन गई है। हालांकि मल्होत्रा इस बयान पर कई बार स्पष्टीकरण दे चुके हैं और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग चुके हैं, लेकिन विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। भाजपा के ही कुछ नेताओं ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक शिकायत भेजी है और मल्होत्रा को पद से हटाने की मांग की है।

भाजपा की अंदरूनी कलह आई सामने

इस विवाद ने भाजपा की आंतरिक गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए जाने के बाद सबसे पहले विरोध भाजपा के भीतर से ही शुरू हुआ।

पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर और भाजपा पार्षद कुलजीत सिंह संधू ने ऑस्ट्रेलिया से वीडियो संदेश जारी कर मल्होत्रा के बयान की आलोचना की। उन्होंने न केवल सार्वजनिक विरोध दर्ज कराया बल्कि प्रधानमंत्री को शिकायत भेजकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी उठाई। मनोनीत पार्षद सतिंदर सिंह समेत कई भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर प्रमुखता से उठाया। वायरल किए गए कुछ बयानों में मल्होत्रा पर पंजाबियों, किसानों और ग्रामीण समुदायों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने के आरोप भी लगाए गए।

माफी के बावजूद नहीं थम रहा विवाद

जितेंद्र मल्होत्रा ने वीडियो जारी कर कहा कि यदि उनके किसी शब्द से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए दिल से क्षमा चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी समुदाय का अपमान करने के उद्देश्य से नहीं था, बल्कि उन्होंने स्वयं के संदर्भ में यह टिप्पणी की थी।

मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने उनके बयान का केवल एक हिस्सा वायरल कर उसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया, जिससे क्षेत्रीय और सामाजिक भावनाएं भड़काने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा, “मैं स्वयं एक पंजाबी हूं। मेरा जन्म और पालन-पोषण अमृतसर में हुआ है। मुझे अपनी पंजाबी पहचान पर गर्व है और हमेशा रहेगा।”

नगर निगम चुनाव से पहले बढ़ी भाजपा की चिंता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के भीतर चल रही यह खींचतान आगामी नगर निगम चुनावों में पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। चुनाव में छह महीने से भी कम समय बचा है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति खुलकर सामने आने लगी है।

भाजपा के एक वर्ग का मानना है कि संगठन में बदलाव की जरूरत है, जबकि दूसरा गुट मौजूदा नेतृत्व के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी सक्रिय हो गई हैं। दोनों दल इस मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं।

कांग्रेस पर भी साधा निशाना

अपने स्पष्टीकरण में मल्होत्रा ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाबियों की भावनाएं वास्तव में तब आहत हुई थीं जब कांग्रेस शासन के दौरान पंजाब के विभाजन, हरमंदिर साहिब पर सैन्य कार्रवाई और 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसी घटनाएं हुईं।

उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर कांग्रेस नेताओं की चुप्पी आज भी सवाल खड़े करती है। फिलहाल, यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चंडीगढ़ भाजपा की अंदरूनी राजनीति और आगामी चुनावी रणनीति पर भी इसका असर पड़ता दिखाई दे रहा है।

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