दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 26 जून : जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड (JKBOSE) द्वारा तय की गई पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम को सभी पंजीकृत स्कूलों में लागू करने के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने इस मामले में निजी स्कूलों के संगठन जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल्स यूनाइटेड फ्रंट की अपील को खारिज कर दिया।
यह अपील बोर्ड के उन निर्देशों के खिलाफ दायर की गई थी, जिनमें निजी स्कूलों को JKBOSE द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम और किताबों का ही उपयोग करने के लिए कहा गया था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थान स्थापित करने और उनका संचालन करने का अधिकार पूर्ण रूप से असीमित नहीं है तथा सार्वजनिक हित में सरकार और नियामक संस्थाएं इस क्षेत्र में उचित नियम लागू कर सकती हैं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के अंतर्गत व्यवसाय या पेशा चुनने की स्वतंत्रता प्राप्त है, लेकिन यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, समानता और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
डिवीजन बेंच ने यह भी माना कि पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों का निर्धारण शिक्षा व्यवस्था के नियमन का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य पूरे केंद्र शासित प्रदेश में शैक्षणिक मानकों की एकरूपता बनाए रखना और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा नीति तैयार करना, पाठ्यक्रम निर्धारित करना और पुस्तकों का चयन करना विशेषज्ञ संस्थाओं तथा नियामक निकायों का कार्यक्षेत्र है। न्यायालय ऐसे मामलों में तभी हस्तक्षेप कर सकता है, जब कोई नीति स्पष्ट रूप से मनमानी, अवैध या तर्कहीन साबित हो।
अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकों का चयन करने का अधिकार जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड के पास है और शिक्षा की गुणवत्ता तथा शैक्षणिक समानता को ध्यान में रखते हुए बनाए गए नियम संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के संगठन की अपील खारिज करते हुए बोर्ड की नीति को वैध ठहराया, जिसके तहत सभी पंजीकृत स्कूलों के लिए JKBOSE द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।