दैनिक खबरनामा । शिमला, 26 जून : हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने लंबित पेंशन संबंधी मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर नाराजगी जताई है। समिति का कहना है कि मंत्रिमंडल की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में पेंशनभोगियों को संशोधित पेंशन का लाभ अब तक नहीं मिल सका है। विशेष रूप से शिमला नगर निगम के लगभग 800 पेंशनरों से जुड़ी फाइलें अभी तक आगे की प्रक्रिया के लिए नहीं भेजी गई हैं।
समिति ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मांग की है कि संबंधित फाइलों को बिना देरी शहरी विकास निदेशालय को भेजा जाए। इसके अलावा संगठन ने सरकार से निगमों और बोर्डों के 6,564 कर्मचारियों को पेंशन योजना में शामिल करने, 40 प्रतिशत वित्तीय लाभ से संबंधित अधिसूचना जारी करने तथा लंबित 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) देने की भी मांग उठाई है। इस संबंध में समिति ने शिमला नगर निगम के महापौर को ज्ञापन सौंपा।
समिति के प्रदेश अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री को सौंपे गए 14 सूत्रीय मांगपत्र को लेकर सरकार के साथ दो चरणों में बातचीत हो चुकी है। उनके अनुसार छह मांगों पर कार्रवाई शुरू हुई है, लेकिन वित्तीय लाभों से जुड़े प्रमुख मामलों में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इसी महीने राज्य मंत्रिमंडल ने शहरी स्थानीय निकायों के करीब 2,300 पेंशनरों को 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के आधार पर पेंशन देने को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की थी। इसके बावजूद संबंधित फैसले का लाभ अभी तक जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पाया है। समिति का आरोप है कि कई पेंशनरों को अभी भी वर्ष 2006 के वेतनमान के अनुसार पेंशन दी जा रही है, जबकि शहरी विकास विभाग पहले ही स्थानीय निकायों को आवश्यक प्रस्ताव भेजने के निर्देश जारी कर चुका है।
समिति ने सरकार से 29 अक्टूबर 1999 की अधिसूचना को पुनः लागू करने और निगमों व बोर्डों के शेष 6,564 कर्मचारियों को पेंशन सुविधा प्रदान करने की मांग भी दोहराई। साथ ही सरकार को उसके पूर्व आश्वासनों की याद दिलाते हुए कहा गया कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए सभी पेंशनरों को 31 जुलाई 2026 से पहले 40 प्रतिशत वित्तीय लाभ तथा लंबित 15 प्रतिशत डीए का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक अधिसूचनाएं जारी नहीं की गईं, तो पेंशनरों का आंदोलन पूरे हिमाचल प्रदेश में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।