दैनिक खबरनामा। लेह, 6 अगस्त: लद्दाख आने वाले सैलानियों के लिए बड़ी खबर है। अब यहां पर्यटक खुली जीप में बैठकर हिम तेंदुए को करीब से देख सकेंगे। इको-टूरिज्म को नया आयाम देने के लिए उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के ऊंचे इलाकों में सफारी शुरू करने को हरी झंडी दे दी है। यह भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ़ सफारी होगी।
उप-राज्यपाल ने वन विभाग को कहा है कि काज़ीरंगा और रणथंभौर जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के मॉडल पर गाइडेड जीप सफारी शुरू की जाए। इसके लिए विशेष रूप से तैयार खुली जीपें चलेंगी। इन्हें स्थानीय ड्राइवर और प्रशिक्षित गाइड संचालित करेंगे। इसका उद्देश्य अवैध ऑफ-रोडिंग और जंगली जानवरों को परेशान करने की घटनाओं पर रोक लगाना है। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना और यात्रियों को बेहतर अनुभव देना भी है।
हेमिस से द्रास तक बनेंगे रूट
यह निर्णय हाल ही में गठित स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर यानी SHAN कंजर्वेशन सोसाइटी की पहली गवर्निंग बॉडी बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता उप-राज्यपाल श्री सक्सेना ने की। वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग और काराकोरम वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी के अलावा नुब्रा, जंस्कार, शाम, करगिल और द्रास क्षेत्रों में सफारी के संभावित मार्ग चिन्हित किए जाएं। इन इलाकों में दुर्लभ हिम तेंदुए और पक्षियों की कई प्रजातियां बड़ी संख्या में मिलती हैं।
20 युवाओं को मिलेगी पक्षी-दर्शन की ट्रेनिंग
योजना के तहत 20 स्थानीय युवाओं का चयन कर उन्हें बर्ड-वॉचिंग, पक्षियों की पहचान और उन्हें ट्रैक करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ में उन्हें दूरबीन भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अतिरिक्त प्रमुख पक्षी क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए 10 ‘बर्ड-वॉचिंग हाइड्स’ भी बनाए जाएंगे।
लद्दाख में है देश के सबसे अधिक हिम तेंदुए
आंकड़ों के अनुसार भारत में अनुमानित 718 हिम तेंदुओं में से 477 अकेले लद्दाख में रहते हैं। यानी देश की सबसे बड़ी आबादी यहीं है। लद्दाख में स्तनधारियों की 38 से अधिक प्रजातियां, पक्षियों की 340 प्रजातियां और 1,800 प्रकार के संवहनी पौधे भी पाए जाते हैं।
16 जून को बनी SHAN सोसाइटी का मकसद
SHAN सोसाइटी का गठन इस साल 16 जून को LG द्वारा किया गया था। इसका लक्ष्य लद्दाख में समुदाय आधारित वन्यजीव संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त पर्यटन को प्रोत्साहन, टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करना और जिम्मेदार पर्यटन के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करना है। सोसाइटी लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण का एक नया मॉडल बनाना चाहती है। इसमें सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय भी नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
उप-राज्यपाल ने लद्दाख की अनोखी जैव विविधता और ऊंचाई वाले संवेदनशील इकोसिस्टम को क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राकृतिक धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि संरक्षण तभी सफल होगा जब स्थानीय लोग प्रकृति की सुरक्षा में भागीदार बनें और उन्हें इससे आर्थिक लाभ भी मिले। LG ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सर्दियों में हिम तेंदुए दिखने का मौसम शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।