दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 13 अगस्त: उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 अगस्त को हुई कांग्रेस की जनसभा के बाद मंच पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर सियासत तेज हो गई है। यह मामला गुरुवार को राज्यसभा में भी उठा, जहां विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे संविधान और लोकतंत्र पर हमला बताया।

खरगे ने सदन में क्या कहा

राज्यसभा में मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। उस दौरान न तो उन्होंने किसी धर्म का नाम लिया और न ही किसी समुदाय का जिक्र किया। उन्होंने सिर्फ सरकार की नीतियों और जनसमस्याओं को रखा।

लेकिन उनके भाषण खत्म होते ही बीजेपी से जुड़े लोगों ने उसी मंच पर ‘पवित्रता’ के लिए हवन कर दिया। खरगे ने सवाल किया, “क्या लोकतंत्र में इस तरह की हरकतें होती हैं? क्या इसी को आप संविधान की रक्षा कहते हैं? मैं इस सदन में विपक्ष का नेता हूं।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “मैं इसे राजनीति का विषय नहीं बनाना चाहता। मैं दशकों से संसद का हिस्सा हूं। मैं अनुसूचित जाति से आता हूं, मैं दलित हूं। मैंने आज तक कभी नहीं कहा कि मेरी मदद करो या मुझे बचाओ। मुझमें लड़ने की क्षमता है और मैं लड़ता हूं। लेकिन मेरे साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया गया। मेरे जाने के बाद मंच को ‘शुद्ध’ किया गया। यह मेरा अपमान है।”

नड्डा का जवाब: घटना दुखद, जांच होगी

खरगे के बयान पर सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो कुछ हल्द्वानी में हुआ वह वाकई निंदनीय है। यह सिर्फ कांग्रेस के लिए नहीं, पूरे देश के लिए तकलीफदेह है।

नड्डा ने स्पष्ट किया कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है और न ही कभी करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया, “हम इस पूरे प्रकरण की जांच कराएंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले को देखेंगे। आपकी भावनाएं आहत हुईं, इसके लिए खेद है।”

कुमारी शैलजा ने साधा निशाना

इस बीच कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक तरफ बीजेपी-आरएसएस ‘तिरंगा यात्रा’ और देशभक्ति की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता के साथ समानता के सिद्धांत का उल्लंघन किया जा रहा है। वही सिद्धांत जिसकी गारंटी संविधान देता है।

शैलजा ने कहा, “उत्तराखंड बीजेपी शासित राज्य है। वहीं पर हमारी रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ किया जा रहा है। आखिर यह कैसा शुद्धिकरण है? असल में उत्तराखंड को ऐसी सोच और ऐसी मानसिकता से मुक्ति की जरूरत है। सत्ता में रहते हुए इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

फिलहाल सरकार ने मामले की जांच का भरोसा दिया है, लेकिन इस मुद्दे ने संसद से लेकर सड़कों तक बहस छेड़ दी है।

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