जयपुर 7 जनवरी(दैनिक खबरनामा)जयपुर पिंक सिटी के मोहल्ला म्हारो की नदी थाना क्षेत्र अंतर्गत शाही इमामबाड़े के समीप सड़क पर अवैध रूप से रखी गई लकड़ी की टाल और उसके सामने चल रही अवैध गैस रिफिलिंग को लेकर स्थानीय नागरिकों और इमामबाड़े के पदाधिकारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि सड़क पर इस प्रकार लकड़ी का भंडारण और खुलेआम गैस रिफिलिंग की गतिविधियां किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।इमामबाड़े के प्रतिनिधियों ने बताया कि उक्त लकड़ी की टाल सार्वजनिक सड़क पर अवैध रूप से लगाई गई है, जिससे राहगीरों, श्रद्धालुओं और वाहन चालकों को गंभीर खतरा बना हुआ है। वहीं, इसके ठीक सामने की जा रही अवैध गैस रिफिलिंग न केवल विस्फोट की आशंका को बढ़ाती है, बल्कि यह सुरक्षा मानकों और कानूनों का खुला उल्लंघन भी है।इमामबाड़े के पदाधिकारियों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग करते हुए कहा,सड़क पर रखी गई लकड़ी की टाल को तत्काल हटाया जाए और अवैध गैस रिफिलिंग को बंद कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस और संबंधित विभाग इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें, ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।स्थानीय निवासियों ने मोहल्ला म्हारो की नदी थाना प्रशासन से भी शीघ्र कार्रवाई की अपील की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्रवासियों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
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सीधी | 29 दिसंबर | अमित मिश्रा सीधी जिले के मझौली क्षेत्र अंतर्गत पांढ, ताला एवं मझौली धान खरीदी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जबकि जिला कलेक्टर सीधी द्वारा उपार्जन केंद्रों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं और कई स्थानों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है, इसके बावजूद कुछ प्रभारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मझौली खरीदी केंद्र स्थित पांढ व ताला क्षेत्र का है, जहां उपार्जन केंद्र प्रभारी नियमों को ताक पर रखकर धान खरीदी कर रहे हैं। स्थानीय किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी को न तो किसी अधिकारी का डर है और न ही किसी कार्रवाई की परवाह। पूर्व में अधिकारियों द्वारा खरीदी केंद्र का निरीक्षण भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि निर्धारित 41 किलो की जगह 41 किलो 200 ग्राम तक धान भरवाया जा रहा है। इतना ही नहीं, नियमों के विपरीत धान की तौल और बोरा भराई का कार्य किसान स्वयं करने को मजबूर हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि अतिरिक्त धान भरवाने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन मजबूरी में वे इस व्यवस्था को सहन कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि कलेक्टर के सख्त निर्देशों और पूर्व निरीक्षण के बावजूद आखिर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी उपार्जन केंद्र प्रभारियों पर कब सख्त कार्रवाई करता है।
- Vishal
- December 29, 2025