नई दिल्ली 8 जनवरी (दैनिकखबरनामा) नई दिल्ली वेनेज़ुएला को लेकर अमेरिका की हालिया कार्रवाई और सख्त रुख पर दुनिया के कई देशों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। मलेशिया, रूस, चीन और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों ने अमेरिकी कदमों की आलोचना करते हुए इसे एक संप्रभु राष्ट्र के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। लेकिन सवाल यह उठता है कि भारत ने इस मुद्दे पर खुलकर बयान क्यों नहीं दिया और उसने संतुलित या सीमित प्रतिक्रिया तक ही खुद को क्यों सीमित रखा?भारत की विदेश नीति: संतुलन और रणनीति
भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से रणनीतिक संतुलन (Strategic Autonomy) पर आधारित रही है। भारत न तो किसी एक धड़े के साथ पूरी तरह खड़ा होता है और न ही वैश्विक टकरावों में जल्दबाजी में पक्ष लेता है। वेनेज़ुएला के मामले में भी भारत ने यही रुख अपनाया है।भारत अमेरिका के साथ रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग में लगातार आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ तीखी सार्वजनिक टिप्पणी करना भारत के व्यापक कूटनीतिक हितों के खिलाफ जा सकता है। यही कारण है कि भारत अक्सर ऐसे संवेदनशील मामलों में संयमित भाषा का इस्तेमाल करता है।तेल और आर्थिक हित भी हैं अहम वेनेज़ुएला लंबे समय तक भारत का एक महत्वपूर्ण कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता रहा है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने वहां से तेल आयात काफी हद तक कम कर दिया, लेकिन भारत भविष्य के विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। भारत जानता है कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति तेजी से बदलती है और भविष्य में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।