हरियाणा 16 जनवरी (दैनिक खबरनामा) हरियाणा जींद
सोनीपत रेलवे ट्रैक पर झाड़ियों और सूखी घास की सफाई का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन को देखते हुए इसे बेहद जरूरी माना जा रहा है। अभी तक ट्रैक के किनारे प्रभावित क्षेत्रों को भी चिह्नित नहीं किया गया है।रेलवे नियमों के अनुसार ट्रैक के दोनों ओर कम से कम 10-10 मीटर तक झाड़ियों और घास को पूरी तरह साफ रखना अनिवार्य है, क्योंकि हाइड्रोजन गैस अत्यंत ज्वलनशील और संवेदनशील होती है। सोनीपत ट्रैक के कई हिस्सों में फिलहाल घनी झाड़ियां और सूखी घास मौजूद हैं, जो विशेषकर गर्मी के मौसम में बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं। तेज धूप और बढ़ते तापमान में छोटी सी चिंगारी भी गंभीर हादसे का रूप ले सकती है।हाइड्रोजन ट्रेन जैसी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परियोजना की सफलता के लिए ट्रैक की सुरक्षा सबसे अहम है। यदि समय रहते सफाई नहीं की गई तो भविष्य में यह बड़ी समस्या बन सकती है।
कटाई के मौसम में बढ़ता है आग का खतरा ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाले इस रेलवे ट्रैक के आसपास बड़े पैमाने पर खेती होती है। गेहूं की कटाई के दौरान आगजनी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार आग फैलकर रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाती है। पहले भी ट्रैक के पास आग लगने की घटनाओं से रेल यातायात प्रभावित हो चुका है। ट्रैक किनारे झाड़ियां और सूखी घास होने से आग तेजी से फैल सकती है।टेस्टिंग के लिए भेजा गया एक और सैंपल हाइड्रोजन ट्रेन में उपयोग होने वाली गैस की टेस्टिंग के लिए एक और सैंपल भेजा गया है। फिलहाल गैस से नमी हटाने के लिए हीटर नहीं लगाए गए हैं, जिस कारण ठंड के मौसम में गैस में नमी आ रही है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस समय वायरिंग का काम जारी है। पिछले दिनों लखनऊ से स्पेशल कोच के जरिए वायरिंग से संबंधित सामान जींद पहुंचा था। रिपोर्ट सही आने पर आरडब्ल्यूएसओ (RWSO) की टीम दोबारा जींद पहुंचकर आगे की जांच करेगी।