हरियाणा 3 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा ) हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के डेंटल सर्जन और एचसीएस भर्ती प्रकरण में विजिलेंस ब्यूरो को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवन गुप्ता को आरोपों से मुक्त करते हुए डिस्चार्ज कर दिया।विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने 32 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। अदालत के अनुसार मामला मुख्य रूप से ‘सुनाई-सुनाई’ बातों और अधूरे डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित था, जो किसी भी व्यक्ति को आरोपित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।विजिलेंस का आरोप था कि पवन गुप्ता ने पांच अभ्यर्थियों के रोल नंबर मुख्य आरोपी को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे। हालांकि अदालत ने पाया कि जांच अधिकारी ने उन पांचों अभ्यर्थियों से न तो पूछताछ की और न ही उन्हें गवाह बनाया। इसे जांच की गंभीर चूक माना गया।अभियोजन ने व्हाट्सएप चैट को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत अनिवार्य प्रमाणपत्र पेश नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैधानिक प्रमाणपत्र के बिना डिजिटल साक्ष्य स्वीकार्य नहीं होते।इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति भी नहीं ली गई थी।अदालत ने टिप्पणी की कि केवल संदेह या सह-आरोपी के बयान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। स्वतंत्र गवाह या पैसों की रिकवरी जैसे ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं। इस फैसले के बाद विजिलेंस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं और माना जा रहा है कि इसका असर अन्य आरोपियों पर भी पड़ सकता है।
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