उत्तर प्रदेश 16 जनवरी (दैनिक खबरनामा) उत्तर प्रदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मृत सरकारी कर्मचारी की वसीयत (विल) के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित नियम, 1974 के तहत अनुकंपा नियुक्ति का एकमात्र आधार यह है कि आवेदक मृतक कर्मचारी पर वास्तव में निर्भर था या नहीं।जस्टिस मनीष माथुर ने अपने फैसले में कहा कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत वसीयत के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता तय की जाए। पंजीकृत वसीयत का अनुकंपा नियुक्ति से कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार की नियुक्ति का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को आर्थिक संकट से उबारना होता है, इसलिए यह देखना आवश्यक है कि आवेदक वास्तव में आश्रित था या नहीं और नियुक्ति से विधवा व नाबालिग बच्चों सहित पूरे परिवार का हित सुरक्षित हो।मामले में याचिकाकर्ता ने अपने भाई की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। उसका दावा था कि मृतक की पत्नी उससे अलग रह रही थी और उसने ही अपने भाई की देखभाल की थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि मृतक ने उसके पक्ष में वसीयत बनाई थी, लेकिन विभाग ने केवल वसीयत के आधार पर नियुक्ति देने से इनकार कर दिया।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मृतक की पत्नी और याचिकाकर्ता दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन विरोधाभासी दस्तावेजों के कारण दोनों के दावे खारिज कर दिए गए थे। हाईकोर्ट ने 1974 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि परिवार की परिभाषा में अविवाहित भाई भी शामिल है, लेकिन कहीं भी वसीयत को प्राथमिकता देने का प्रावधान नहीं है।कोर्ट ने विवादित आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मृतक की बेटी के हितों को ध्यान में रखते हुए दोनों आवेदनों पर कानून के अनुसार नए सिरे से और शीघ्र निर्णय लिया जाए।
You May Also Like
हर्षोल्लास के साथ लोहड़ी मनाई गई। युवाओं व बच्चों ने इस उत्सव का भरपूर आनंद लिया।
- Vishal
- January 12, 2026