उत्तराखंड 17 जनवरी (दैनिक खबरनामा) उत्तराखंड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) द्वारा शुरू की गई टेंपो ट्रैवलर सेवा का एकतरफा किराया 120 रुपये तय किए जाने के विरोध के बाद निगम ने किराया घटाने का फैसला लिया है। गुरुवार देर शाम एचआरटीसी ने आईएसबीटी से चमियाना तक प्रति व्यक्ति किराया 57 रुपये निर्धारित कर दिया।लोगों का कहना था कि पहले एक मरीज और उसके साथ एक तीमारदार के लिए एक तरफ का किराया 240 रुपये पड़ रहा था, जो आम जनता के लिए महंगा था। किराया घटने से मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। लोगों ने साथ ही मांग की है कि इस रूट पर साधारण बस सेवा भी शुरू की जाए।
स्थानीय लोगों का सुझाव है कि यदि टेंपो ट्रैवलर निगम के लिए महंगा साबित हो रहा है, तो इस मार्ग पर छोटी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा सकती हैं। इससे मरीज और उनके परिजन 30 से 40 रुपये में अस्पताल तक पहुंच सकेंगे।
हालांकि टेंपो ट्रैवलर सेवा को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, लेकिन 120 रुपये का किराया लोगों को अखर रहा था। इस सेवा के शुरू होने से अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों के साथ-साथ सुबह से शाम तक शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को भी सुविधा मिली है।चमियाना फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डॉ. यशवंत वर्मा ने टेंपो ट्रैवलर सेवा शुरू करने पर परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक निपुन जिंदल का आभार जताया। उन्होंने कहा कि किराया कम किया जाना जरूरी था, क्योंकि रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल आते हैं।एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुर वर्मा ने बताया कि लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए किराया कम किया गया है। अब आईएसबीटी से चमियाना तक टेंपो ट्रैवलर का किराया 57 रुपये तय किया गया है।पहले लोअर हिमाचल से आने वाले यात्रियों को आईएसबीटी से पुराने बस अड्डे, फिर संजौली या ढली और भट्ठाकुफर होते हुए चमियाना पहुंचना पड़ता था। इस दौरान कई बार बस बदलनी पड़ती थी। अब आईएसबीटी से टेंपो ट्रैवलर सीधे खलीनी-बीसीएस और पंथाघाटी होते हुए चमियाना अस्पताल पहुंच रही है, जिससे मरीजों को बार-बार बस बदलने की परेशानी से निजात मिली है।नागरिक सभा के अध्यक्ष जगमोहन ठाकुर ने कहा कि इस रूट पर निगम की साधारण बस चलाई जानी चाहिए, ताकि मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों को सस्ती परिवहन सुविधा मिल सके। वहीं, नागरिक सभा के अध्यक्ष विवेक कश्यप ने कहा कि अस्पताल मजबूरी में जाने वालों के लिए है, इसलिए किराया न्यूनतम रखा जाना चाहिए, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।