पंजाब 20 जनवरी ( दैनिक खबरनामा) पंजाब पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एक कथित वीडियो ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस वीडियो में चन्नी पार्टी की एक बैठक के दौरान यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि पंजाब कांग्रेस
में अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और महासचिव जैसे सभी प्रमुख पद कथित तौर पर ऊंची जातियों के नेताओं के पास हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे हालात में निचली जातियों से जुड़े कार्यकर्ताओं को आखिर जाना कहां चाहिए।बताया जा रहा है कि यह टिप्पणी चन्नी ने हाल ही में पार्टी की अनुसूचित जाति (एससी) विंग की बैठक के दौरान की थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य में बड़ी दलित आबादी होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई।चन्नी ने दी सफाई विवाद बढ़ने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने बयान पर सफाई जारी की। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है और उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। चन्नी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां दी हैं और उन्होंने हमेशा ईमानदारी से पार्टी के लिए काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है और उनके शब्दों को जानबूझकर जातिवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। वड़िंग ने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी ने ही चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया था।राहुल गांधी के बयान से जुड़ रही चर्चा इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया रुख का भी इस विवाद से जोड़कर उल्लेख किया जा रहा है। राहुल गांधी ने हाल ही में शीर्ष संवैधानिक पदों पर पिछड़े वर्गों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के कम प्रतिनिधित्व को लेकर असहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि देश की बड़ी आबादी अब भी उच्च संस्थागत नियुक्तियों से बाहर है और इस स्थिति में पारदर्शिता और संतुलन की आवश्यकता है।राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि इन पदों के लिए आवेदन करने वालों में दलित समुदाय से जुड़े लोगों की संख्या 7 प्रतिशत से भी कम है।