नई दिल्ली 7 मार्च (दैनिक खबरनामा) केंद्र सरकार दिल्ली की सात पुरानी सरकारी आवासीय कॉलोनियों का बड़े स्तर पर पुनर्विकास कर रही है। इस परियोजना की खास बात यह है कि इसे स्व-वित्तपोषित मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है, जिसमें न तो सरकारी खजाने और न ही करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने परियोजना की लागत निकालने के लिए कुल जमीन के एक छोटे हिस्से को व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए विकसित करने की योजना बनाई है। यह जमीन कुल परियोजना क्षेत्र का लगभग 69.41 एकड़, यानी करीब 12.9 प्रतिशत है। इससे होने वाली आय से पूरी परियोजना को वित्तपोषित किया जाएगा।यह पुनर्विकास परियोजना सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, नौरोजी नगर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर कॉलोनियों को कवर करती है। ये सभी कॉलोनियां मिलाकर लगभग 537 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं। इनमें मौजूद कई सरकारी आवास काफी पुराने हो चुके हैं और करीब 40 प्रतिशत इमारतों को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 20 हजार से अधिक घरों की कमी भी सामने आई है।परियोजना के तहत पुराने कम ऊंचाई वाले मकानों की जगह आधुनिक बहुमंजिला आवासीय परिसर बनाए जाएंगे, जिससे 21 हजार से ज्यादा नए फ्लैट उपलब्ध होंगे। साथ ही बेहतर बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन कॉलोनियों में बने 2,722 नए फ्लैट्स का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, कस्तूरबा नगर और श्रीनिवासपुरी में सामान्य पूल आवासीय योजना के तहत 6,632 नए फ्लैट्स की आधारशिला भी रखी जाएगी।अधिकारियों के मुताबिक, इस स्व-वित्तपोषित मॉडल के तहत सीमित जमीन के व्यावसायिक उपयोग से करीब 35,100 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है, जिससे लगभग 32,800 करोड़ रुपये की पुनर्विकास लागत पूरी हो जाएगी। इससे सरकारी बजट पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और सरकार को करीब 2,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ भी मिल सकता है।